Ranchi : झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. पिछले 15 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सत्याग्रह कर रहे छात्रों ने शनिवार को शहीद निर्मल महतो के शहादत दिवस पर अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. इस दौरान छात्रों ने अपने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के कारण हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है. छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा. आंदोलनकारियों ने आगामी चुनावों में सरकार के खिलाफ जनमत तैयार करने की भी चेतावनी दी.
छात्र JSSC CGL, JPSC और EDPL से जुड़ी कथित रूप से विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि लगातार परीक्षा प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है.
उत्पाद सिपाही भर्ती को लेकर भी छात्रों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि शारीरिक परीक्षा के दौरान 20 अभ्यर्थियों की मौत हुई, लेकिन इस मामले में सरकार की ओर से पर्याप्त जवाब नहीं दिया गया. छात्रों ने परीक्षा के कटऑफ और परिणाम को लेकर भी सवाल उठाते हुए कथित गड़बड़ी की जांच की मांग की है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
छात्रों ने लंबे समय से दरोगा भर्ती नहीं होने का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि 2017-18 के बाद नियमित दरोगा भर्ती नहीं होने के कारण कई अभ्यर्थी उम्र सीमा पार कर चुके हैं. छात्रों ने नई भर्ती का परीक्षा कैलेंडर जारी करने और प्रभावित अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में छूट देने की मांग की है. इसके अलावा PGT परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग भी आंदोलनकारियों ने की है.
सरकार की वार्ता प्रक्रिया पर भी छात्रों ने सवाल उठाए हैं. आंदोलनकारियों का आरोप है कि सभी छात्र संगठनों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने के बजाय अलग-अलग संगठनों को बुलाया जा रहा है. छात्रों ने इसे 'डिवाइड एंड रूल' की रणनीति करार दिया. उनका कहना है कि जब विभिन्न छात्र संगठनों ने सर्वसम्मति से अपनी मांगों का मांग-पत्र सरकार को सौंप दिया है, तो उस पर निर्णय लेने के बजाय अलग-अलग स्तर पर सुझाव मांगे जा रहे हैं.
आंदोलन में शामिल जमशेदपुर की एक ST वर्ग की छात्रा ने कहा कि छात्र वर्षों तक मेहनत और ईमानदारी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन कथित अनियमितताओं के कारण उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाता. छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण उनके सपनों पर असर पड़ रहा है.
पिछले 15 दिनों से जारी सत्याग्रह में कई छात्र अनशन पर भी बैठे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती और उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. अब सबकी नजर 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव पर है. सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन और व्यापक रूप लेता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा.
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