Ranchi News : JSSC CGL परीक्षा विवाद के बीच DGP अनुराग गुप्ता का एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इंटरव्यू में DGP ने कहा था कि परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का कोई साक्ष्य नहीं मिला है. वहीं, अब इसी मामले की जांच नई CID टीम कर रही है. जांच के दौरान साक्ष्य मिलने और संबंधित लोगों से पूछताछ किए जाने की बात सामने आ रही है. ऐसे में DGP के पुराने बयान को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है.
मामले पर CPI(ML) के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि जब किसी मामले की जांच चल रही हो तो अधिकारियों को जांच पूरी होने से पहले इस तरह का बयान देने से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपना निष्कर्ष सामने रखने देना चाहिए. अधिकारियों की ओर से जांच के दौरान ही किसी निष्कर्ष की बात कहना उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि JSSC CGL मामले की जांच अब नई CID टीम कर रही है. नई टीम की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, यह महत्वपूर्ण है. यदि जांच में साक्ष्य मिलते हैं तो उनके आधार पर दोषियों की पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए.
BJP की ओर से JSSC CGL मामले की CBI जांच की मांग किए जाने पर CPI(ML) के राज्य सचिव ने इसे निराधार मांग बताया. उन्होंने कहा कि झारखंड में JPSC की पहली और दूसरी परीक्षा से जुड़े मामलों में CBI जांच हुई थी, लेकिन अब तक उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है. ऐसे में केवल CBI जांच की मांग करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि जांच का परिणाम सामने आना और दोषियों पर कार्रवाई होना ज्यादा महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों की ओर से CBI जांच की मांग की जा रही है, लेकिन फिलहाल नई CID टीम मामले की जांच कर रही है. जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो रही है और उसमें सामने आने वाले तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि JSSC CGL का मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है. हाईकोर्ट इस मामले में जो भी फैसला सुनाएगा, उसके बाद सरकार उस फैसले पर क्या निर्णय लेती है, यह महत्वपूर्ण होगा. सरकार को अदालत के आदेश के अनुरूप अभ्यर्थियों के हित में आगे की कार्रवाई करनी चाहिए.
CPI(ML) के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि परीक्षा और भर्ती से जुड़े मामलों में अधिकारियों को जांच पूरी होने से पहले किसी तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय अभ्यर्थियों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और निष्पक्ष जांच के जरिए पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए.
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