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जज उत्तम आनंद हत्याकांड : दो सजायाफ्ता की सजा बरकरार, HC ने इसे जुडिशयरी पर अटैक माना

कोर्ट-कचहरी की खबरें

Ranchi : बहुचर्चित जज उत्तम आनंद हत्याकांड मामले में दो सजायाफ्ता राहुल वर्मा और लखन वर्मा की सजा के खिलाफ क्रिमिनल अपील पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोनों की याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने उनके इस कदम को ज्यूडिशयरी पर अटैक माना है. कोर्ट ने निचले अदालत द्वारा दिए गए उनकी सजा को बरकरार रखा है. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सब्यसाची ने पैरवी की.

 

दरअसल, धनबाद की सीबीआई कोर्ट द्वारा मामले में दो अभियुक्तों राहुल वर्मा और लखन वर्मा को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी. हाईकोर्ट में क्रिमिनल अपील दायर कर इसे दोनों ने चुनौती दी थी.

  

उल्लेखनीय है कि पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रार्थी की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था. साथ ही कोर्ट ने धनबाद की सीबीआई कोर्ट से लोअर कोर्ट रिकॉर्ड (एलसीआर) मांगा था. कोर्ट के आदेश के आलोक में एलसीआर हाईकोर्ट आ चुका है. 

 

बता दें कि 28 जुलाई 2021 की सुबह जज उत्तम आनंद की ऑटो से टक्कर मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में स्पीडी ट्रायल कर अभियुक्तों को सजा सुनाई गई थी. धनबाद सीबीआई की विशेष अदालत ने 6 अगस्त 2022 को दोषी राहुल वर्मा और लखन वर्मा को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. कोर्ट ने इन्हें अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा दी है. यह फैसला सीबीआई जज रजनीकांत पाठक ने सुनाया था. 

 

इससे पहले 28 जुलाई 2022 को जज उत्तम आनंद की पहली पुण्यतिथि के मौके पर ही कोर्ट ने ऑटो ड्राइवर लखन वर्मा और उसके साथी राहुल वर्मा को दोषी ठहराया था. इन दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (अपराध के सबूतों को गायब करना, या अपराधी को बचाने के लिए झूठी जानकारी देना) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत आरोप तय किए गए थे.

 


    
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