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कर्नाटक के राज्यपाल भाषण बीच में छोड़ कर चले गये, सिद्धारमैया ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने  बाद में कहा, राज्यपाल को विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करना होता है.  उनका भाषण मंत्रिमंडल तैयार करता है. आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल द्वारा तैयार भाषण पढ़ने के बजाय  राज्यपाल ने खुद का तैयार भाषण पढ़ा. उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 176 और 163 का उल्लंघन करार दिया.  कहा कि हम विचार कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट जायें या नहीं.
 

Bengaluru :  कर्नाटक विधानसभा में आज गुरुवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत राज्य सरकार द्वारा तैयार भाषण बीच में ही छोड़ कर निकल गये. राज्यपाल द्वारा भाषण पूरा नहीं पढने और सदन छोड़ कर चले जाने पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा, राज्य सरकार राज्यपाल के रवैये का विरोध करेगी.  सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर मंथन करेगी.

 

 
राज्यपाल जब विस से बाहर जाने लगे तो कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने विधानसभा द्वार पर उन्हें रोकने की कोशिश की और पूरा  भाषण पढ़ने का अनुरोध किया, लेकिन श्री गहलोत रुके नहीं. राज्यपाल द्वारा सदन का बहिष्कार किये जाने के बाद  कांग्रेस के एमएलए और एमएलसी ने राज्यपाल के खिलाफ नारे लगाये.  

 

 कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने राज्यपाल पर हमलावर होते हुए कहा, क्या राज्यपाल का कार्यालय भाजपा का कार्यालय बन गया है?

 

प्रियांक खड़गे ने कहा, यह अनुच्छेद 176 और 163 का उल्लंघन  है?  हमने राज्यपाल के भाषण में जो कुछ भी कहा है, वह सब तथ्य है. उसमें कुछ भी झूठ नहीं है, फिर भी राज्यपाल उसे पढ़ने से क्यों इनकार कर रहे हैं 

 

उन्होंने कहा कि यदि राज्यपाल राज्य के मुद्दों पर लिखा गया भाषण पढ़ना नहीं चाहते हैं, तो भाषण सार्वजनिक किया जाना चाहिए,  ताकि लोग सच जान पायें. आरोप लगाया कि उच्चाधिकारियों द्वारा राज्यपाल को ऐसा करने का आदेश दिया जा रहा है.प्रियांक खड़गे ने कहा कि राज्यपाल स्वतंत्र नहीं हैं.  

 

 कर्नाटक के कानून मंत्री एचके पाटिल ने कहा, यह लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन है. श्री पाटिल ने कहा, पाटिल ने कहा, राज्यपाल ने संविधान का अपमान किया है. हम इस पर उचित निर्णय लेंगे. 

 

 मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने  बाद में कहा, राज्यपाल को विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करना होता है.  उनका भाषण मंत्रिमंडल तैयार करता है. आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल द्वारा तैयार भाषण पढ़ने के बजाय  राज्यपाल ने खुद का तैयार भाषण पढ़ा.

 

उन्होंने भी इसे संविधान के अनुच्छेद 176 और 163 का उल्लंघन करार दिया.  कहा कि  हम विचार कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट जायें या नहीं. याद करें कि इससे पहले कल  तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि भी विधानसभा में भाषण दिये बिना चले गये थे.  

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