आईटीआई का भवन बने 8 साल गुजर गए
झारखंड सरकार ने 2015 में मंजूरा पंचायत के पूरनापानी में आठ करोड़ की लागत से भव्य आईटीआई भवन बनवाया. लेकिन सरकार की उदासीन रवैये के कारण 8 साल बाद भी ये शुरु नहीं हो सका है. लक्ष्य के अनुरूप चालू आईटीआई चालू हो जाता तो तकनीकी शिक्षा के लिए इस क्षेत्र के हजारों शिक्षित युवा को रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ती. साथ हीं क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ते. शिक्षित बेरोजगार युवाओं का पलायन रूक सकता था. हर चुनाव में नेता और प्रत्याशी इसे अपनी घोषणापत्र में शामिल करते रहे हैं, लेकिन प्रतिनिधियों ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की.बीएसएल ने की वादाखिलाफी
बीएसएल ने 2016 में कसमार प्रखंड के मंजूरा स्थित आइआटीआई के संचालन का जिम्मा लिया था. राज्य सरकार ने सेल के अधिकारियों से आइटीआई को सीएसआर के तहत लेने का आग्रह किया. जिसके बाद बीएसएल और राज्य सरकार के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ. बीएसएल ने इसी एमओयू के आधार पर वर्ष 2016 में कसमार के आइटीआई में नामांकन के साथ पढ़ाई चालू कराने की घोषणा की थी. लेकिन बाद में बीएसएल ने अपना हाथ खींच लिया. [caption id="attachment_549897" align="alignnone" width="300"]alt="" width="300" height="178" /> कसमार के मंजूरा में बना आईटीआई भवन[/caption]
आठ करोड़ की लागत से बना है भवन
करीब चार एकड़ क्षेत्रफल में फैले आईटीआई भवन का निर्माण 8 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है. इस परिसर में आईटीआई का प्रशासनिक भवन, 12 ट्रेड के लिए कार्यशाला, 100 बेड का हॉस्टल, कैंटिन, चतुर्थ व तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए 16 कमरे, प्रिंसिपल का निवास समेत की ज़रूरी भवन बने हुए हैं. चार डीप बोरिंग भी हुई है.2015 से भवन बनकर तैयार
तत्कालीन श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं भवन निर्माण मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के हाथों 3 जनवरी 2013 में इसकी आधारशिला रखी गयी थी. जिसके बाद 2015 में यह भवन बनकर तैयार हो गया. फिलहाल मंजुरा के इस आइटीआई भवन में एक एनजीओ द्वारा कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया जा रहा है. यह">https://lagatar.in/bokaro-rpf-arrested-two-smugglers-with-21-kg-of-marijuana/">यहभी पढ़ें : बोकारो : आरपीएफ ने 21 किलो गांजा के साथ दो तस्करों को दबोचा [wpse_comments_template]

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