Search

 
 
 

शाहबानो और तीन तलाक पर बयान देते समय तथ्यों का रखें ध्यान: अख्तर अली

Ranchi News: अख्तर अली ने कहा कि वर्ष 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो मामले में तलाकशुदा मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता पाने का अधिकार दिया था. इसके बाद 1986 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के अधिकारों से संबंधित अलग कानून बनाया. इसमें मेहर, आर्थिक सहायता और संपत्ति से जुड़े प्रावधान शामिल थे.
 
अख्तर अली

Ranchi News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता अख्तर अली ने भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के शाहबानो प्रकरण और तीन तलाक को लेकर दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय ऐतिहासिक तथ्यों, कानूनों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को सही संदर्भ में समझना चाहिए.

 

अख्तर अली ने कहा कि वर्ष 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो मामले में तलाकशुदा मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता पाने का अधिकार दिया था. इसके बाद 1986 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के अधिकारों से संबंधित अलग कानून बनाया. इसमें मेहर, आर्थिक सहायता और संपत्ति से जुड़े प्रावधान शामिल थे. इस कानून को लेकर देश में बहस हुई, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2001 में इसकी व्याख्या करते हुए महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट किया.

इसे भी पढ़ें - 

 

उन्होंने कहा कि 10 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम तलाकशुदा महिला दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता मांग सकती है. इसलिए इस विषय पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे कानूनी इतिहास को समझना जरूरी है.

 

तीन तलाक के मुद्दे पर अख्तर अली ने कहा कि मोदी सरकार ने तलाक की पूरी प्रक्रिया समाप्त कर दी है, ऐसा कहना सही नहीं है. वर्ष 2019 के कानून के तहत तत्काल और अपरिवर्तनीय तीन तलाक को शून्य और अवैध घोषित किया गया तथा इसके लिए सजा का प्रावधान किया गया. हालांकि तलाक के अन्य तरीकों और उनकी वैधता की कानूनी स्थिति अलग है.

 

उन्होंने कहा कि तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन जैसी प्रक्रियाओं में निर्धारित समय अंतराल और सुलह की संभावना महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में इन प्रक्रियाओं की तुलना एक ही बैठक में तीन तलाक देने की प्रथा से करना उचित नहीं है.

 

अख्तर अली ने कहा कि बाबूलाल मरांडी को शाहबानो मामले, 1986 के कानून और तीन तलाक से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर बयान देते समय तथ्यों की पूरी जानकारी रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा राजनीतिक प्रचार तक सीमित नहीं होना चाहिए. असली उद्देश्य हर महिला को सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और न्याय दिलाना तथा कानून का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करना होना चाहिए.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही