Kiriburu (Shailesh Singh) : सारंडा जंगल के दर्जनों सुदूरवर्ती गांवों में पेयजल संकट गहरा गया
है. सेल की
किरीबुरू एंव मेघाहातुबुरु आवासीय क्षेत्र के किनारे बसी लगभग पांच हजार से अधिक आबादी इस भीषण गर्मी में पेयजल जैसी संकट से व्यापक रूप से जूझ रही
है. इनमें प्रोस्पेक्टिंग,
बकल हाटिंग, गाड़ा हाटिंग, पीडब्लूडी हाटिंग, मेन मार्केट, मंगलाहाट हाटिंग, चर्च हाटिंग, आरसी सिंह हाटिंग, मुर्गापाड़ा, बिरसा हाटिंग,
टीओपी हाटिंग,
मालंग टोली व आसपास के तमाम क्षेत्र के लोग शामिल
हैं. सेल प्रबंधन द्वारा विभिन्न
हाटिंगों में कुछ नलकूप अवश्य
लगाये हैं. लेकिन इन नलकूपों से नियमित व एक निश्चित समय पर पेयजल आपूर्ति नहीं किये जाने से उक्त
हाटिंगों में रहने वाले लोगों का जीवन शैली व रोजगार प्रभावित हो रहा
है. जिससे वह पेयजल की भारी समस्या के साथ-साथ आर्थिक संकट से ग्रसित होकर मानसिक रूप से परेशान हो रहे
हैं. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-anishs-deadly-bowling-west-singhbhum-beat-ramgarh-by-6-wickets/">चाईबासा
: अनिश की घातक गेंदबाजी, पश्चिमी सिंहभूम ने रामगढ़ को 6 विकेट से हराया पानी के जुगाड़ में निकल जाता है पूरा दिन
[caption id="attachment_610014" align="aligncenter" width="600"]

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/16rc_m_28_16042023_1.jpg"
alt="" width="600" height="400" /> लोकेश्वर मंदिर से पानी भरकर ले जाती मेन मार्केट की बच्चियां[/caption] स्थानीय लोगों ने बताया कि शहर में दिन में एक बार ही सेल प्रबंधन द्वारा पेयजल आपूर्ति काफी कम समय के लिए की जाती
है. जिसका कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं
है. इसके अलावे पेयजल आपूर्ति के लिए शहर में दूसरा कोई विकल्प नहीं है और न ही चापाकल
है. निर्धारित समय पर पानी उपलब्ध नहीं होने से लोगों को रोजमर्रा के कार्यों पर
व्यापकर पड़ता है. क्योंकि
हाटिंग में रहने वाले
प्रायः लोग जंगलों के वन उत्पाद आदि पर निर्भर
हैं. कुछ बतौर ठेका
श्रमिक खादानों आदि में मेहनत मजदूरी करने जाते
हैं. ग्रामीण तब तक कहीं काम करने नहीं जा पाते जबतक की सप्लाई पानी नल से पानी नहीं भर
लेते. अगर पानी भरे बगैर काम पर या जंगल गये तो इस गर्मी में फिर पानी नहीं मिल
पायेगा. अगर पानी के
लिये रूके तो काम पर नहीं जा पाते, जिससे आर्थिक समस्या उत्पन्न हो जाती
है. पानी की सप्लाई काफी कम समय तक होने की वजह से सभी लोगों को
लाइन में लगने के बावजूद जरूरत अनुसार पानी नहीं मिल पाता
है. यह समस्या गर्मी के मौसम में और विकराल रूप धारण कर ली
है. बकल हाटिंग और गाड़ा
हाटिंग के पास रहने वाले लोग पास के झरना का पानी अपने रोजमर्रा के कामों में करते
हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-help-and-help-launched-cleanliness-awareness-campaign-in-bagbeda-colony/">जमशेदपुर
: बागबेड़ा कॉलोनी में हेल्प एंड हेल्प ने चलाया स्वच्छता जागरुकता अभियान डीसी भी कर चुके हैं पहल, नहीं हो पाया समाधान
स्थनीय सांसद, विधायक, उपायुक्त, जिला परिषद सदस्य, प्रमुख व मुखिया से लेकर सभी पानी की समस्या का समाधान करने में असफल रहे
हैं. किरीबुरू शहर की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 3 हजार फीट
है. इस कारण कभी भी यहां डीप बोरवेल के द्वारा पानी निकालने का कार्य सफल नहीं हो
पाया. सेल प्रबंधन
ओडिशा के
कारो नदी से पानी पंप व मोटर से डालमिया फिल्टर प्लांट में लाकर तथा फिल्टर कर टाउनशिप में पेयजल आपूर्ति करती
है. यहां से भी सेल प्रबंधन को जितना पानी की जरूरत है उतना पानी नहीं मिल पा रहा
है. उपायुक्त ने पिछले दिनों
किरीबुरू क्षेत्र की
हाटिंगों का भ्रमण कर पेयजल स्थिति को करीब से समझने की कोशिश की
थी. उन्होंने भी पाया था की स्थिति वास्तव में गंभीर
है. उन्होंने सेल अधिकारियों व पीएचईडी विभाग के अधिकारियों से वार्ता की
थी. तय हुआ था कि
बराईबुरु स्थित
कारो नदी से पानी
पाईप लाइन बिछाकर
किरीबुरू शहर तक पहुंचाया
जायेगा. लेकिन यह योजना कब तक
प्रारम्भ व पूर्ण होगी वह भविष्य के गर्त में
है. लेकिन तब तक इस शहर के लोगों को पेयजल समस्या से किसी भी मौसम में मुक्ति मिलते नहीं दिखायी दे रही
है. [wpse_comments_template]
Leave a Comment