Kiriburu (Shailesh Singh) : किरीबुरु-मेघाहातुबुरु में रहने वाले उत्तर भारत के लोगों ने मेष संक्रांति के दिन सतुआन पर्व हर्षोउल्लास के साथ मनाया. लोगों ने रविवार को भगवान को भोग के रूप में सत्तू एवं कच्चा आम अर्पित कर प्रसाद के रुप में दोनों का सेवन किया. यह पर्व गर्मी के मौसम का स्वागत करता है. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-now-voters-will-not-have-to-walk-15-km-to-vote/">चांडिल
: अब मतदाताओं को वोट देने के लिए 15 किमी नहीं चलना होगा पैदल इस पर्व में प्रसाद के रूप में सत्तू खाया जाता है, इसलिए इसका नाम सतुआन है. गर्मी के मौसम में सत्तू और कच्चा आम हमारे शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है. सत्तू पेट को भरा-पूरा रखता है और लू से बचाता है. इसी वजह से लोग सतुआन पर्व मनाते हैं. [wpse_comments_template]
: अब मतदाताओं को वोट देने के लिए 15 किमी नहीं चलना होगा पैदल इस पर्व में प्रसाद के रूप में सत्तू खाया जाता है, इसलिए इसका नाम सतुआन है. गर्मी के मौसम में सत्तू और कच्चा आम हमारे शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है. सत्तू पेट को भरा-पूरा रखता है और लू से बचाता है. इसी वजह से लोग सतुआन पर्व मनाते हैं. [wpse_comments_template]
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