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किरीबुरू : सेवानिवृत्त सेल अधिकारी भी न्यायालय का चक्कर लगाने को मजबूर

Kiriburu (Shailesh Singh) : चाईबासा न्यायालय से न्याय नहीं मिलने से सेल अधिकारी वर्षों से परेशान हैं. सबसे ज्यादा परेशान सेवानिवृत्त सेल अधिकारी हैं. उन्हें चाईबासा न्यायालय में केश के सिलसिले में निरंतर अन्य शहरों से आना पड़ता है. अब ऐसे अधिकारी सेल प्रबंधन से चाईबासा में एक ट्रांजिट हाऊस की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं. ताकि न्यायालय में डेट के दौरान उन्हें ठहरने में दिक्कतों का सामना करना नहीं पडे़. सेल, बीएसएल की झारखंड खान समूह की पश्चिम जिले के सारंडा रिजर्व वन क्षेत्र में चार खादानें हैं. किरीबुरु, मेघाहातुबुरु, गुवाचिड़िया खदान है. रिजर्व वन क्षेत्र में खदान होने की वजह से छोटे मामलों को लेकर भी वन विभाग सेल के उच्च अधिकारियों से लेकर सेल के ठेकेदारों पर फॉरेस्ट एक्ट के विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर देती है. ऐसे मामलों में कुछ मामले ऐसे होते हैं जो वन विभाग के अधिकार विद्वेष के तहत गलत तरीके से दर्ज करा देते हैं. दर्ज मामलों की जानकारी सेल अधिकारियों अथवा ठेकेदारों को पांच वर्ष बाद केश खुलने पर होती है. तब तक कई अधिकारियों का स्थानान्तरण हो जाता है, या वो सेवानिवृत्त हो जाते है. इसे भी पढ़ें :मनोहरपुर">https://lagatar.in/manoharpur-girl-accuses-lover-of-sexual-exploitation/">मनोहरपुर

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80 वर्ष की उम्र में लगा रहे न्यायालय का चक्कर

सेल के सेवानिवृत्त कार्यपालक निदेशक रमेश सिन्हा, पूर्व महाप्रबंधक एमके बिंदू भी उन्हीं में से एक है. दोनों केश के सिलसिले में चाईबासा व किरीबुरु का चक्कर पिछले एक माह से काट रहे हैं. रमेश सिन्हा ने बताया कि हमलोगों को पता भी नहीं था कि वन विभाग ने कब केश किया था. जब चाईबासा न्यायालय से सम्मन आया तो पता चला की उन लोगों के खिलाफ खदान क्षेत्र में झाड़ियों की कटाई, टावर का निर्माण कराने से संबंधित मामले को लेकर केश किया गया है. वन विभाग के पूर्व अधिकारी विद्वेष वश मामला दर्ज करा देते थे. क्योंकि एक बार सेल की मेघाहातुबुरु गेस्ट हाऊस का सारा कमरा फूल था. उसी समय पूर्व डीएफओ आ गये, जिन्हें हम कमरा उपलब्ध नहीं करा पाये. वह नाराज होकर वन विभाग की बराईबुरु गेस्ट हाऊस में ठहरे थे. दूसरे एक मामले में किरीबुरु के पूर्व रेंजर ने हमारे एक अधिकारी के साथ गलत बर्ताव कर दिया था. इसके बाद उनसे ऐसा बर्ताव नहीं करने को कहा गया था. इन्हीं वजहों से नाराज होकर वन विभाग के लोग हमलोगों पर फर्जी केश दर्ज करा देते थे. रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि हमारी उम्र 80 वर्ष हो गई. हम हार्ट समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं. हमारा उम्र अब न्यायालय का चक्कर लगाने का नहीं रहा. सेल से सेवानिवृत्त हुये भी हमें 10 वर्ष से अधिक हो गये है. कब तक न्यायालय में दौड़ते रहें. इसे भी पढ़ें :चांडिल">https://lagatar.in/chandil-sri-sri-108-ramcharit-manas-navanh-parayan-mahayagya-made-the-atmosphere-devotional/">चांडिल

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