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Kiriburu : ग्रामीण व बेरोजगार युवा हेमंत सरकार की घंटी बजाने के लिए एकजुट हों - गीता कोड़ा

  • बंद खदानें खोलवाने, वनाधिकार का पट्टा लेने व अपना हक अधिकार देने की मांग
  • घंटा बजाओ सरकार जगाओ अभियान में उमड़े ग्रामीण
Kiriburu (Shailesh Singh) : पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने शनिवार को भी सारंडा व कोल्हान वन प्रमंडल की सभी बंद पड़ी खदानों को खोलने, वनाधिकार पट्टा से वंचित लोगों को वनाधिकार पट्टा सरकार से देने की मांग को लेकर पदयात्रा है. कार्यक्रम के तहत नक्सल प्रभावित सारंडा के चिड़िया, अंकुआ, सलाई, दोदारी, रोवाम, गंगदा, नुईया आदि क्षेत्रों का तूफानी दौरा किया. दौरा के क्रम में ग्रामीणों की भारी भीड़ पदयात्रा में शामिल हुई. दौरे के क्रम में गीता कोड़ा ने रोवाम में ग्रामीणों साथ भोजन भी किया. उन्होंने कहा कि सारंडा में खनिज का अकूत भंडार होने के बावजूद यहां के लोग बेरोजगारी व पलायन का दंश झेलने को मजबूर हैं. इसे भी पढ़ें : Chakradharpur">https://lagatar.in/chakradharpur-sonuas-balesinghi-co-operative-society-honored-for-excellent-work/">Chakradharpur

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बड़ाजामदा में आयोजित होगा विशाल आम सभा

वर्तमान सरकार ने सारंडा की प्रायः खदानों को एक साजिश के तहत वर्षों से बंद रखी है, ताकि ग्रामीण व बेरोजगार आगे नहीं बढ़ सकें. ग्रामीणों को अपने परिवार का पालन-पोषण करना काफी मुश्किल हो गया है. आए दिन विभिन्न रेलवे स्टेशनों से पलायन करने वाले बेरोजगारों की भीड़ दिखाई देती है. लगभग पांच साल से झामुमो-कांग्रेस गठबंधन की हेमंत सरकार राज्य में बनी है, तब से हेमंत सरकार लाखों पदों पर नियुक्ति निकाल कर नौकरी देने की बात कही है. लेकिन अब तक एक प्रतिशत लोगों को नौकरी नहीं मिली है और न ही बेरोजगारी भत्ता दिया गया है. झामुमो ने 2019 के विधानसभा चुनावी घोषणा पत्र में कहा था अगर हम नौकरी नहीं देंगे तो बेरोजगारों को 5000 एवं 7000 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता देंगे. खदान खोलो अभियान यात्रा के अंतिम दिन 28 अगस्त को बड़ाजामदा में रैली एवं विशाल आमसभा का आयोजन किया जायेगा. इसे भी पढ़ें : Chandil">https://lagatar.in/chandil-a-murmur-of-agitation-has-started-regarding-the-bad-condition-of-the-road/">Chandil

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मुश्किल से रोजमर्रा की जरूरतों को करते हैं पूरा

गीता कोड़ा ने कहा कि सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र के जंगलों में आदिवासी एवं अन्य समुदाय सदियों से निवास करते आ रहे हैं. इनकी संख्या लाखों में है. इन क्षेत्रों के निवासी वनोत्पाद खाकर या बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं. इन पैसों से वे रोजमर्रा की जरूरत की चीजों को बहुत मुश्किल से पूरा करते हैं. इनलोगों का जीविकोपार्जन का मुख्य आधार वन है. इनकी वन भूमि ही इनका पहचान का मूल आधार है. गरीब आदिवासी जंगल और जमीन पर अपने अधिकार के लिए सदियों से लड़ाई लड़ते आ रहे हैं. केन्द्र सरकार द्वारा वनक्षेत्रों में रह रहे आदिवासी एवं अन्य गरीब लोगों को वन अधिकार अधिनियम के तहत वनपट्टा देने के लिए कानून बनाया. इसे भी पढ़ें : Ghatshila">https://lagatar.in/ghatshila-children-celebrated-janmashtami-in-kidzee-pre-school/">Ghatshila

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वनपट्टा आवेदन पर नहीं किया गया विचार

वर्ष 2023 में हेमंत की सरकार ने वनक्षेत्रों के निवासियों से ग्रामसभा कर वनपट्टा दावे का आवेदन जिला के प्रखंड, अंचल कार्यालय में मांगा गया था. वनक्षेत्रों में रह रहे गरीब लोग बहुत उम्मीद के साथ व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वनपट्टा लेने के लिए हजारों की संख्या में आवेदन हेमंत सरकार के पास किये हैं, परन्तु आज तक उनके आवेदन पर कोई विचार नहीं किया गया. वनपट्टा हेतु तीन सितंबर को नोवामुंडी, चार सितंबर को मनोहरपुर, पांच सितंबर को जगन्नाथपुर, छह सितंबर को गोईलकेरा एवं सात सितंबर को टोन्टो प्रखंड कार्यालय में धरना-प्रदर्शन किया जायेगा. इसमें सारंडा एवं कोल्हान वन क्षेत्र के गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल होकर सरकार की घंटी बजायें. [wpse_comments_template]

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