: सात फीट लंबा अजगर निकला, वनकर्मियों ने पकड़ कर जंगल में छोड़ा
आश्वासन के बाद भी नहीं मिली मदद
बसंती अकेली रहती है और उनके परिवार में कोई नहीं है. उनके पास पहले राशन कार्ड नहीं था लेकिन लगभग तीन माह पहले ही उनका राशन कार्ड बना है. इस वृद्ध महिला की झोपड़ी निर्माण हेतु दो वर्ष पहले हीं पुलिस व प्रशासनिक पदाधिकारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों ने वृद्धा से मिल अनेक आश्वासन व वायदे किये थे. लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ. इसे भी पढ़ें : किरीबुरू">https://lagatar.in/kiriburu-gua-intec-leader-ducha-toppo-accused-of-misusing-letter-pads-of-bokaro-steel-workers-union/">किरीबुरू: गुआ इंटक नेता दुचा टोप्पो पर लगा बीएसडब्ल्यूयू के लेटर पैड दुरुपयोग करने का आरोप
इंदिरा आवास भी नहीं हुआ उपलब्ध
सेल का लीज क्षेत्र होने की वजह से इन्हें सरकारी इंदिरा आवास देने में भी परेशानी हो रही है. वृद्धा अपने समय की मैट्रिक पास है. वह जंगल से लकड़ी व वनोत्पाद भी लाकर अपना गुजर करती है. इस महिला के अलावे सारंडा की दर्जनों वृद्धों, अनाथ बच्चों को प्रतिमाह संतोष पंडा राशन व अन्य खाद्य सामग्री पहुंचाते रहते हैं ताकि कोई भूखे न रहे. कोरोना काल में भी संतोष पंडा ने कोरोना मरीजों के घर पीपीई कीट पहन दवा व जरूरी समान, भोजन व दवाइयाँ पहुंचाई थी. वे विपत्ति में जरूरतमंदों के लिये हमेशा दूत बनकर खडे़ रहते हैं. उनकी लोकप्रियता से झारखण्ड एंव ओडिशा की पुलिस-प्रशासन के उच्च अधिकारी भी वाकिफ हैं तथा विभिन्न संस्थाओं द्वारा उन्हे सम्मानित भी किया जा चुका हैं.
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