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किरीबुरू : गंभीर रूप से बीमार राजेश प्रसाद के इलाज को आगे आए समाजसेवी संतोष पंडा

Kiriburu (Shailesh Singh) : किरीबुरू के चर्च हाटिंग निवासी राजेश प्रसाद (47 वर्ष) की गंभीर बीमारी व खराब स्थिति से संबंधित लगातार न्यूज में खबर चलने के बाद सारंडा समेत झारखण्ड-उड़ीसा सीमावर्ती क्षेत्र के सबसे बडे़ व प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता संतोष कुमार पंडा आगे निःस्वार्थ आये हैं. उन्होंने सेल की किरीबुरू जेनरल अस्पताल में भर्ती राजेश प्रसाद व उनके परिवार से मुलाकात की. उन्होंने गंभीर रूप से बीमार राजेश प्रसाद को बेहतर इलाज हेतु ओडिशा के एक अस्पताल में भेजने के लिए वाहन एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई.   इसे भी पढ़ें : किरीबुरू">https://lagatar.in/kiriburu-ankita-murder-case-cluster-womens-organization-demands-execution-of-the-killer/">किरीबुरू

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पिछले 10 दिनों से भर्ती है सेल अस्पताल में

संतोष पंडा ने पीड़ित परिवार को अपना सम्पर्क नम्बर दिया एवं कहा कि आगे भी मरीज की इलाज में किसी प्रकार की कोई सहायता की जरूरत होगी तो वह उनसे सम्पर्क कर सकते हैं. हालांकि संतोष पंडा राजेश प्रसाद को बेहतर इलाज हेतु भुवनेश्वर के एक बडे़ अस्पताल में भेजना चाह राहे थे, लेकिन परिवार के सदस्य राउरकेला स्थित एक अस्पताल में ले जाने की बात कहे. इसके बाद संतोष ने राउरकेला भेजने हेतु सारी व्यवस्था उपलब्ध कराई. उल्लेखनीय है कि राजेश प्रसाद सेल अस्पताल में पिछले लगभग 10 दिनों से भर्ती थे. बेहतर इलाज हेतु डॉक्टर उन्हें बाहर ले जाने की सलाह दी थी. राजेश को लीवर से संबंधित बीमारी है एवं वह खून की उल्टी कर रहे थे. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-rs-5300-snatched-by-attacking-in-sonari/">जमशेदपुर

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सेल अस्पताल में हुई इलाज के बाद खून की उल्टी हुई बंद

हालांकि सेल अस्पताल में हुई इलाज के बाद खून की उल्टी होना तो बंद हो गया था लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था. राजेश की पत्नी, बेटी आदि लोगों के घरों में काम कर अपना जीविकोपार्जन चलाती है. इनके पास राजेश को बाहर ले जाने हेतु वाहन की व्यवस्था समेत इलाज हेतु पैसे भी नहीं थे. ऐसी स्थिति में समाजसेवी संतोष पंडा ने ईश्वर का दूत बनकर इस गरीब परिवार के लिये खड़ा हुए हैं. दूसरी तरफ सेल की किरीबुरू-मेघाहातुबुरू, झंडिबुरू, टीएसएलपीएल आदि खदान प्रबंधन के अलावे सारंडा क्षेत्र के किसी भी सरकारी अथवा गैर-सरकारी संगठनों के पास एक भी एम्बुलेंस नहीं है जो ऐसी आपातकालीन स्थिति में गरीबों अथवा जरूरतमंद मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भेजने हेतु उपलब्ध हो सके. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-residents-of-dam-colony-in-panic-from-wild-animals-targeting-goats-and-chickens/">चांडिल

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निर्वाचित जनप्रतिनिधि मौन एवं कूंभकर्णी निंद में सोये हुए हैं

यह दुर्भाग्य की बात है कि सारंडा की तमाम खदान प्रबंधने प्रतिवर्ष डीएमएफटी फंड में सैकड़ों-हजारों करोड़ों रुपये इन्हीं कार्यों के लिए देती है, और सुविधाएं दूसरे शहरों व क्षेत्रों के लोगों को मिल रहा है. इस मामले में तमाम निर्वाचित जनप्रतिनिधि मौन एवं कूंभकर्णी निंद में सोये हुए हैं. जनता की तनिक भी चिंता इन्हें नहीं है. बीते पंचायत चुनाव में किरीबुरू पूर्वी पंचायत के मुखिया मंगल सिंह गिलुवा ने भी लोगों को भरोसा दिया था कि चुनाव खत्म होते हीं वह एक एम्बुलेंस तथा पानी टैंकर किरीबुरू पूर्वी पंचायत के लोगों को उपलब्ध करा देंगे. लेकिन आज तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं हुआ. सांसद, विधायक, जिला परिषद आदि भी अब तक इस दिशा में कोई सहायता प्रदान नहीं करा पाये हैं.
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