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किरीबुरू : चेकडैम निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को नहीं मिल रही न्यूनतम मजदूरी, ठेकेदार पर लगा आरोप

Kiriburu (Shailesh Singh) : सेल की गुवा प्रबंधन सारंडा के जंगल व नदी-नाला को बचाने के लिए लोहे की जाली से कच्चा चेकडैम का निर्माण करा रही है. इसे लेकर कार्य तीव्र गति से चल रहा है. परंतु इस कार्य में लगे मजदूरों को ठेकेदार द्वारा न्यूनतम मजदूरी नहीं दिए जाने से मजदूर काफी परेशान हैं. इस चेकडैम के निर्माण कार्य में जोजोगुटू, बाईहातु, बड़ा जामकुंडिया आदि गांवों के लगभग 20 मजदूरों को लगाया गया है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-in-the-indoor-badminton-stadium-two-junior-players-accuse-the-senior-of-molesting/">चाईबासा

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उक्त चेकडैम का निर्माण हेतु गुवा प्रबंधन द्वारा बकायदा निविदा निकाल गुआ के एक ठेकेदार को ही काम आवंटित किया गया है. ठेकेदार भी प्रभावित गांव के मजदूरों को काम पर लगाकर चेकडैम निर्माण करा रहा है. वैसे यह पहल रानी चुआं क्षेत्र की पहाड़ी व जंगलों से निकलने वाले खदान की डम्प ओवर वार्डन मिट्टी और पत्थर से जंगल व नदी को बचाने के लिए की जा रही है. [caption id="attachment_367542" align="aligncenter" width="488"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/kiriburu-check-dam-1.jpeg"

alt="" width="488" height="325" /> सेल की गुवा प्रबंधन द्वारा ठेकेदार के माध्यम से बनाया जा रहा चेकडैम[/caption]

मात्र 250 रुपये ही मिल रही मजदूरी

उल्लेखनीय है कि सेल की तमाम खादानों व स्टील प्लांटों में कार्य करने वाले ठेका मजदूरों में अकुशल मजदूरों का 443 रुपये, अर्द्ध कुशल का 543 रुपये एंव कुशल श्रेणी के मजदूरों 643 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय है. इसके अलावे वर्क ऑफ जॉब के अनुसार एडब्लूए (सभी कार्य में नहीं) आदि के रुप में अतिरिक्त पैसा मिलता है. इस काम में लगे मजदूरों को भी नियमतः न्यूनतम मजदूरी 443 रुपया मिलना चाहिये. लेकिन इन मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी के नाम पर मात्र 250 रुपये ही दिए जा रहे है.
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[caption id="attachment_367545" align="aligncenter" width="502"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/kiriburu-check-dam-2.jpeg"

alt="" width="502" height="334" /> चेकडैम तथा कार्य में लगे सारंडा के गांवों के मजदूर[/caption]

स्थानीय मुखिया पहल नहीं किए जाने से मजदूर नाराज

सेल प्रबंधन के नये नियम अनुसार सेल की किसी भी निविदा से जुड़ी कार्य में लगे मजदूरों का नाम बी रजिस्टर में दर्ज कर उनके खाते में हीं वेतन भुगतान करना होता है. कार्य से जुड़ी बिलिंग की सीएलसी के लिए जो सूची सेल को उपलब्ध कारवाई जाती है उसमें भी मजदूरों का उल्लेख किया जाता है. तभी उनका बिल स्वीकृत होता है. सेल के ठेकेदार सूत्रों का कहना है कि सेल का काम क्यूबिक मीटर में हो या अन्य तरीके से, उसमें लगे मजदूरों को न्यूनतम 443 रुपया मजदूरी ठेकेदार को देना ही होता है. इसे भी पढ़ें : गालूडीह">https://lagatar.in/galudih-anganwadi-and-phc-running-in-the-same-building-for-years-in-putru-village/">गालूडीह

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लेकिन न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलना यह एक बड़ा मामला है. इसकी उच्च स्तरीय जाँच कराने की मांग के अलावे न्याय दिलाने का आग्रह मजदूरों ने किया है. मजदूरों ने बताया कि छोटानागरा पंचायत की मुखिया मुन्नी देवगम एंव मुंडा कानुराम देवगम भी जोजोगुटू के हैं. यह भी हम मजदूरों के शोषण से वाकिफ हैं लेकिन वह भी हमारी समस्या के लिये आवाज नहीं उठाकर मौन धारण किये हुये हैं. [wpse_comments_template]

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