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ज्ञान समिति की सर्वे रिपोर्ट: 18 जिलों में 71 प्रतिशत लोग तलाश कर रहे रोजगार

झारखंड में रोजगार की स्थिति को लेकर ज्ञान विज्ञान समिति ने शुक्रवार को प्रेस क्लब में सर्वे रिपोर्ट जारी किया. समिति ने बताया कि राज्य के 18 जिलों में सर्वे हुआ है. जिसमें 71 फीसदी लोग रोजगार की तलाश कर रहे हैं. जबकि 95 फीसदी से अधिक लोगों ने कहा कि समय के साथ बेरोजगारी बढ़ती जा रही है.
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Ranchi: झारखंड में रोजगार की स्थिति को लेकर ज्ञान विज्ञान समिति ने शुक्रवार को प्रेस क्लब में सर्वे रिपोर्ट जारी किया. समिति ने बताया कि राज्य के 18 जिलों में सर्वे हुआ है. जिसमें 71 फीसदी लोग रोजगार की तलाश कर रहे हैं. जबकि 95 फीसदी से अधिक लोगों ने कहा कि समय के साथ बेरोजगारी बढ़ती जा रही है. इस मौके पर समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.काशीनाथ चटर्जी ने बताया कि अगस्त-सितंबर 2025 के दौरान 18 जिलों में 4,678 लोगों के बीच सर्वे किया गया. इनमें 2,735 पुरुष और 1,943 महिलाएं शामिल थीं. 

 

सर्वे में शामिल लोगों की आयु करीब 30 वर्ष रही. आय के प्रमुख स्रोत मजदूरी, खेती और स्वरोजगार पाए गए. सर्वे के अनुसार, 96 फीसदी उत्तरदाता शिक्षित थे. इनमें 31 फीसदी ने 11वीं-12वीं तक पढ़ाई की थी. जबकि 30 फीसदी ने छठी से 10वीं तक, 19 फीसदी ने स्नातक और तीन फीसदी ने स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की थी. इसके बावजूद युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है.

 

जारी रिपोर्ट में 49 फीसदी लोगों ने कहा कि अच्छे रोजगार की संभावना बहुत कम है, जबकि 21 फीसदी ने इसे लगभग नहीं के बराबर बताया. 16 फीसदी लोगों ने रोजगार की संभावना अच्छी होने की बात कही. वहीं 35 फीसदी युवा खुद के भविष्य को लेकर परेशान और चिंतित दिखे,15.3 फीसदी ने कहा कि अपने भविष्य से कोई उम्मीद नहीं है.


सर्वे में शामिल लोगों ने बेरोजगारी के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार की नीतियों, व्यवस्था की कमियों, संसाधनों की कमी, कौशल विकास की कमी और संसाधनों के असमान वितरण को प्रमुख कारण बताया. स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए खेती, कृषि,उद्योग और कुटीर उद्योग को विकल्प माना गया.


डॉ. चटर्जी ने कहा कि देश में अब केवल बेरोजगारी ही नहीं, बल्कि अल्प-रोजगार (अंडर एम्प्लॉयमेंट) भी बड़ी चुनौती बन चुका है. शिक्षित युवा अपनी योग्यता से कम स्तर का काम करने या अस्थायी रोजगार स्वीकार करने को मजबूर हैं. उन्होंने आउटसोर्सिंग, संविदा और गिग इकोनॉमी के बढ़ते दायरे पर चिंता जताया है.

 

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