- यूनिवर्सिटी में 68.71 लाख रुपये जीएसटी घोटाला का मामला
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क्या है मामला
आपूर्तिकर्ता सुपर स्टार एजेंसी के साथ एकरारनामे में यह तय हुआ था कि जीएसटी का भुगतान एजेंसी की ओर से किया जायेगा. इसके विपरीत विश्वविद्यालय की ओर से जीएसटी का भुगतान किया गया है. एजेंसी की ओर से विश्वविद्यालय समेत 10 कॉलेजों के लिए कर्मचारियों की आपूर्ति की जा रही है. इन कर्मचारियों के तीन वर्ष 2019 से 2022 तक के पारिश्रमिक के एवज में विश्वविद्यालय की ओर से 68 लाख 71 हजार रुपये जीएसटी का भुगतान किया गया है. इसे भी पढ़ें : कोल्हान">https://lagatar.in/strange-feat-of-kolhstrange-feat-of-kolhan-university-asked-question-what-do-you-explain-to-godi-mediaan-university-asked-explain-on-godi-media/">कोल्हानयूनिवर्सिटी का अजब कारनामा,पूछा सवाल – गोदी मीडिया से क्या समझते हैं?
तत्कालीन प्रभारी कुलपति ने ही दिया था एफआईआर का निर्देश
यह मामला प्रकाश में आने के बाद तत्कालीन प्रभारी कुलपति सह प्रमंडलीय आयुक्त मनोज कुमार के निर्देश पर एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया था. मामले की जांच के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर करने का निर्देश दिया था. बावजूद कार्रवाई नहीं की गयी. अंततः राजभवन की ओर से इस मामले में संज्ञान लेते हुए आदेश दिया गया, तब पिछले दिनों विश्वविद्यालय की ओर से एफआईआर दर्ज कराया गया है. इसे भी पढ़ें : मझगांव">https://lagatar.in/mazgaon-agency-is-getting-child-labor-done-with-poor-construction-in-pradhan-mantri-jal-nal-yojana/">मझगांव: प्रधानमंत्री जल नल योजना में घटिया निर्माण के साथ एजेंसी करवा रही बाल मजदूरी
छह के खिलाफ एफआईआर
इस मामले में विश्वविद्यालय की ओर से चार अधिकारियों समेत कुल छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी गयी है. इनमें पूर्व व पदमुक्त किये जा चुके वित्त सलाहकार रमेश वर्मा, पूर्व वित्त पदाधिकारी डॉ पीके पानी, पूर्व कुलसचिव डॉ जयंत शेखर, मौजूदा सीसीडीसी डॉ मनोज महापात्रा, कर्मचारी पार्थ चक्रवर्ती एवं एक सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-17-out-of-120-papers-from-around-the-world-are-of-students-of-jharkhand/">जमशेदपुर: दुनिया भर के 120 में से 17 पेपर झारखंड के छात्रों के
कौन है जिम्मेदार
इस मामले में आरोपी बनाये गये विश्वविद्यालय के पूर्व वित्त पदाधिकारी डॉ पीके पानी ने बताया कि वे हों या वित्त सलाहकार उन्हें अंधेरे में रख कर यह वित्तीय गड़बड़ी की गयी है. चूंकि एजेंसी के साथ किया विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच क्या समझौता हुआ था, इसकी जानकारी उन्हें न थी और न अब है. क्योंकि समझौते के क्रम में वित्त सलाहकार या वित्त अधिकारी की की भूमिका नहीं होती है. इसके अलावा संबंधित फाइल उनके पास नहीं होती है. उसके कस्टोडियन सीसीडीसी होते हैं. वर्क ऑर्डर के आधार पर जो बिल दिया जाता है, वित्त पदाधिकारी द्वारा उसी की गणना की जाती है. इस तरह डॉ पानी के अनुसार उनका संकेत सीसीडीसी की ओर है. इसे भी पढ़ें : चैती">https://lagatar.in/chaiti-chhath-devotees-offered-arghya-to-the-setting-sun/">चैतीछठः अस्ताचलगामी सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्घ्य
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