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विद्यालय विकास निधि नहीं मिलने से प्राथमिक व मध्य विद्यालयों की व्यवस्था चरमराई

Ranchi: 7 जनवरी को प्रदेश के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में मूलभूत आवश्यकताओं को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है. सरकार द्वारा प्रतिवर्ष विद्यालय विकास निधि के अंतर्गत दी जाने वाली राशि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जारी नहीं की गई है, जिसके कारण विद्यालयों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.

 

विकास निधि के अभाव में विद्यालयों में आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य पूरी तरह बाधित हो गए हैं. हालात ऐसे हैं कि कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापक अपने पारिवारिक खर्च में कटौती कर विद्यालय की दैनिक जरूरतों जैसे बाल पंजी, कैश बुक, छात्र-शिक्षक उपस्थिति पंजी, मीटिंग बुक, मध्यान्ह भोजन, दैनिक पंजी आदि स्वयं खरीदने को मजबूर हैं.

 

सबसे चिंताजनक स्थिति एकल-शिक्षकीय विद्यालयों की है, जिनका संचालन पारा शिक्षक कर रहे हैं. सीमित मानदेय पर कार्यरत इन शिक्षकों के लिए निजी खर्चों के साथ विद्यालय संचालन का भार उठाना लगभग असंभव हो गया है. परिणामस्वरूप कई विद्यालयों की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है.

 

विद्यालयों में प्रतिदिन खल्ली की आवश्यकता होती है. इसके अलावा साफ-सफाई के लिए झाड़ू, शौचालय की सफाई सामग्री, हाथ धोने के लिए साबुन, सभी कक्षाओं के उपस्थिति पंजी, कैश बुक, मध्यान्ह भोजन पंजी, लेजर बुक, मीटिंग बुक सहित प्रति वर्ष लगभग 40 से 45 प्रकार के रिकॉर्ड पंजी की खरीद अनिवार्य है. विकास निधि नहीं मिलने से विद्यालय भवनों का रंग-रोगन भी नहीं हो पा रहा, जिससे कई स्कूल गंदे और जर्जर नजर आ रहे हैं.

 

अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि शिक्षक अपनी ओर से यथासंभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यदि शीघ्र राशि जारी नहीं की गई तो खल्ली के अभाव में ब्लैकबोर्ड पर पढ़ाई ठप हो सकती है. यह स्थिति गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के शैक्षणिक भविष्य के साथ अन्याय के समान है. विभाग का वर्तमान रवैया उदासीन प्रतीत हो रहा है.

 

उन्होंने बताया कि बच्चे बिना स्कूल किट के पढ़ाई कर रहे हैं. सत्र समाप्त होने में अभी दो महीने शेष हैं, लेकिन छात्रों को दी गई पतली कॉपियां दो महीने पहले ही समाप्त हो चुकी हैं. मजबूरन गरीब अभिभावक जैसे-तैसे कॉपी और पेंसिल खरीदकर बच्चों को उपलब्ध करा रहे हैं ताकि पढ़ाई जारी रह सके.

 

राशि शीघ्र मिलने की उम्मीद में शिक्षक अब तक अपनी जेब से हजारों रुपये खर्च कर चुके हैं. शिक्षक संगठनों ने सरकार से अविलंब विद्यालय विकास निधि जारी करने की मांग की है, ताकि विद्यालयों की व्यवस्था पटरी पर लौट सके और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो.

 

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