Latehar News: जिले में आरसीसी बेंचों की खरीद में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर Lagatar.in ने बड़ा खुलासा किया था. लगातार ने लातेहार: 4500 रुपये के आरसीसी बेंच की 18,800 में खरीद की शिकायत एसीबी से शीर्षक से खबर चलायी थी. खबर में बताया गया था कि बाजार में करीब 4,500 रुपये कीमत वाले आरसीसी बेंच की खरीद 18,800 रुपये प्रति बेंच की दर से दिखाई गई. इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने केस दर्ज किया है. अब जिस व्यक्ति ने इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी, उसे गवाही के लिए बुलाया गया है. मामले में केस दर्ज होने और शिकायतकर्ता को गवाही के लिए बुलाए जाने के बाद आरसीसी बेंचों की खरीद से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है.
4,500 रुपये के बेंच की कीमत 18,800 रुपये कैसे हुई?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल आरसीसी बेंच की खरीद दर को लेकर उठा था. शिकायत के अनुसार, बाजार में जिस बेंच की कीमत करीब 4,500 रुपये बताई गई, उसकी खरीद 18,800 रुपये प्रति बेंच की दर से दर्शाई गई. दोनों कीमतों के बीच 14,300 रुपये का अंतर है. ऐसे में सवाल उठाया गया कि आखिर बेंच की खरीद किस दर पर की गई और भुगतान की दर तय करने का आधार क्या था.
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 15वें वित्त आयोग की राशि से विभिन्न पंचायतों में आरसीसी बेंच लगाए गए थे. इनकी खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता होने का आरोप लगाया गया. शिकायतकर्ता ने इस मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने लाने की मांग की थी.
महुआडांड़, मनिका और सदर प्रखंड में बेंच खरीद पर उठे थे सवाल
शिकायत में दिए गए विवरण के अनुसार, महुआडांड़ प्रखंड में 91, मनिका प्रखंड में 37 और लातेहार सदर प्रखंड में 423 आरसीसी बेंच लगाए गए थे. कुल संख्या 551 बताई गई थी. शिकायतकर्ता का आरोप था कि इन बेंचों की खरीद में बाजार मूल्य की तुलना में काफी अधिक दर दिखाई गई और इस मद में 80 लाख रुपये से अधिक के भुगतान का मामला सामने आया.
इस मामले में आपूर्तिकर्ता फर्मों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे. शिकायत में एके इंटरप्राइसेस, वर्षा इंटरप्राइसेस और हमदान इंटरप्राइसेस का उल्लेख करते हुए कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी. हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही होगी.
शिकायत के बाद ACB ने दर्ज किया केस
आरसीसी बेंचों की खरीद में कथित गड़बड़ी को लेकर सेंटर फॉर आरटीआई के अध्यक्ष पंकज कुमार यादव ने ACB से शिकायत की थी. शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी. इसी प्रकरण में अब ACB द्वारा केस दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है.
मामले में शिकायतकर्ता को गवाही के लिए बुलाया गया है. गवाही के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और खरीद से संबंधित तथ्यों के संबंध में जानकारी ली जा सकती है. हालांकि किस एजेंसी या अधिकारी के समक्ष गवाही होनी है और केस किस कांड संख्या के तहत दर्ज किया गया है, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.
बेंच खरीद के अलावा दूसरे कार्यों में भी अनियमितता के आरोप
शिकायत केवल आरसीसी बेंचों की खरीद तक सीमित नहीं थी. इसमें पंचायतों के ज्ञान केंद्रों में सामग्री की आपूर्ति तथा जलमीनारों की मरम्मत और रखरखाव से जुड़े कार्यों में भी कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था. शिकायतकर्ता ने पिछले तीन वर्षों के दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में हुए इन कार्यों की विस्तृत जांच कराने की मांग की थी.
शिकायत में बेंचों की गुणवत्ता और वारंटी को लेकर भी सवाल उठाए गए थे. आरोप था कि दो वर्ष की वारंटी होने के बावजूद कई बेंच निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही क्षतिग्रस्त होने लगे. इसके अलावा संबंधित फर्मों को काम दिए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे.
अब जांच में सामने आएंगे खरीद और भुगतान से जुड़े तथ्य
Lagatar.in ने आरसीसी बेंच की कीमत और खरीद दर के बीच बड़े अंतर को उजागर करते हुए इस मामले को सामने लाया था. अब ACB द्वारा केस दर्ज किए जाने और शिकायतकर्ता को गवाही के लिए बुलाए जाने के बाद जांच में संबंधित खरीद प्रक्रिया, भुगतान, आपूर्ति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका से जुड़े तथ्यों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा.
सबसे अहम सवाल यही है कि जब एक आरसीसी बेंच की बाजार कीमत करीब 4,500 रुपये बताई गई, तो उसकी खरीद 18,800 रुपये प्रति बेंच की दर से किस आधार पर की गई? क्या खरीद दर का निर्धारण बाजार मूल्य के अनुरूप हुआ था, बेंचों की गुणवत्ता की जांच की गई थी और भुगतान से पहले संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन किया था? इन सवालों का जवाब जांच के निष्कर्षों से ही सामने आएगा.
फिलहाल केस दर्ज होने की जानकारी और शिकायतकर्ता को गवाही के लिए बुलाया जाना इस मामले के महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं. अब नजर इस बात पर है कि जांच में खरीद और भुगतान से जुड़े कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है.
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