Ashish Tagore Latehar : एक जमाना था जब लातेहार में दुर्गा पूजा व अन्य अवसरों पर स्थानीय कलाकारों के द्वारा रामलीला एवं अन्य ऐतिहासिक नाटकों का मंचन किया जाता था. शहर के कलाकारों ने 50-60 के दशक में एक नाटक मंडली की स्थापना की थी. लेकिन अब दशहरा के मौके पर लातेहार में रामलीला या फिर अन्य नाटकों का मंचन नहीं होता है. नाटकों का स्थान ऑरकेस्ट्रा एवं भक्ति जागरण ने ले लिया है. नाटक मंडली के संस्थापक सदस्यों में से एक अशोक कुमार महलका ने बताया कि उन दिनों टीवी व सिनेमा तक नहीं थे. लेकिन लोगों को स्वस्थ मनोरंजन देने के लिए स्थानीय कलाकरों ने एक मंडली बनायी. इस मंडली में बेचू साव, रामनंदन साव, युगल साव, किरानी सिंह, अक्षयवट साव, रामदास साव, प्रयाग साव, रामेश्वर दास, लखन दास, सूरज प्रसाद, धनेश्वर प्रसाद, रविश्वर साव, भोला शरण, रामजनम सिंह, लल्लू सिंह, भुनेश्वर साहु, नथुनी ठाकुर व मोहन दास आदि शामिल थे. इन कलाकारों के द्वारा राजा हरिशचंद्र, सुल्ताना डाकू, रामायण, महाभारत, अंधेर नगरी चौपट राजा आदि नाटकों का मंचन किया गया, जो आज भी उस दौर के लोगों के जेहन में जिंदा है. हालांकि इन कलाकरों में अधिकांश आज दिवगंत हो चुके हैं. श्री महलका ने बताया कि 80 के दशक तक यहां नाटकों का मंचन किया जाता रहा. इसके बाद सिनेमा का दौर आया. पूजा समितियों के द्वारा खुले मैदान में परदे पर सिनेमा दिखाया जाने लगा. इसमें काफी भीड़ जुटती थी. बाद में सिनेमा का स्थान आरकेस्ट्रा ने ले लिया. कोलकाता, वाराणसी, पटना, आसनसोल एवं अन्य जगहों के ऑरकेस्ट्रा ग्रुप यहां आकर कार्यक्रमों का प्रदर्शन करने लगा. इन ऑरकेस्ट्रा में नर्तकियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र होती है. आज भी क्षेत्र में ऑरकेस्ट्रा की यहां काफी डिमांड है. हालांकि कई समितियों के द्वारा भगवती जागरण आदि का भी आयोजन किया जाता है. शहर के श्रीरामचरित मानस महायज्ञ परिसर में विगत कुछ सालों से बाहर से रामलीला की मंडली अवश्य मंगायी जा रही है. इसे भी पढ़ें : रांची">https://lagatar.in/ranchi-criminals-looted-2-50-lakhs-from-women/">रांची
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