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लातेहर : वन अधिकार कानून सख्ती से लागू कराने को लेकर जन सुनवाई का आयोजन

Latehar : मंगलवार को अनुमंडल कार्यालय परिसर में संयुक्त ग्राम सभा मंच (बरवाडीह) के तत्वाअवधान में वन अधिकार कानून (2006) के अधिकार के तहत लंबित सामुदायिक एवं व्यक्तिगत दावा भुगतान और कानून को सख्तील से लागू कराने को ले कर जन सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सुनवाई कार्यक्रम का संचालन विमल सिंह और धन्यवाद ज्ञापन मिथिलेश कुमार ने किया.

 

इस जन सुनवाई में लातेहार और गढ़वा जिले के गारू, मनिका, बरवाडी व चिनिया से हजारों आदिवासी व ग्रामीणों ने भाग लिया. जन सुनवाई में ऐलान किया गया कि अगर आगामी 9 अगस्त  को आदिवासी दिवस तक लंबित सामुदायिक व व्यक्तिगत वन भूमि पट्टा नहीं मिला तो जन आन्दोलन किया जायेगा.

 

सामाजिक कार्यकर्ता जेम्सन हेरेंज ने जनसुवाई में रिपोर्ट पेश की. उन्होंकने कहा कि जो दावे अनुमंडल स्तरीय समिति में जमा हुए हैं, उसमें भारी कटौती हुई है. बरवाडीह प्रखंड के 22 गांव से कुल 16050.5 एकड़ भूमि सामुदायिक अधिकार के लिए दावे किये गए लेकिन, इसमें से केवल 2.7 एकड़ भूमि ही स्वीकृत हुए. सामुदायिक वन अधिकार के दावित भूमि 99.99 प्रतशित की भारी कटौती की गयी है. 0.1 प्रतिशत से भी कम भूमि ग्राम सभाओं को स्वीकृत हुए हैं.

 

उन्होंने कहा कि लातेहार जिला में अनुमंडल और जिला स्तरीय वनाधिकार समिति में करीब 98 सामुदायिक और 1700 व्यक्तिगत वनाधिकार दावा पत्र लंबित हैं. लातेहार जिले में 135 व्यक्तिगत दावों की अनुशंसा अनुमंडल स्तरीय समिति द्वारा जून 2019 में किया गया था लेकिन दावेदारों को पट्टा नहीं मिल पाया. जिला परिषद सदस्य बरवाडीह पूर्वी के कन्हाई सिंह ने वन विभाग के अधिकारी कानून के क्रियान्वन में कोताही कर रहे हैं. जंगल बचाने के नाम पर खाना-पूर्ति कर रहे.

 

जन सुनवाई में कई ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग के अधिकारी ग्रामीणों को डराते है और जो अपने पशुओं को लेकर जंगल में जाते हैं या लकड़ी काटते हैं उनपर पर फर्जी तरीके से मुकदमा दर्ज करती है. यहां तक की टांगी, कोड़ी, कुदाल आदि वन विभाग के लोग छीन लेते हैं. सुप्रीम कोर्ट आयुक्त के पूर्व राज्य सलाहकार बलराम ने कहा कि वन अधिकार कानून का खुला उल्लंघन हो रहा और दावित भूमि में भारी कटौती हो रही है. उन्होंने दावों की स्वीकृति के लिए एक तय समय-सीमा सुनिश्चित करने की मांग की.

 

श्यामा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमें अपने अधिकार लेने के लिए लड़ते रहना होगा, बिना लड़े हमें वन अधिकार कानून के अंतर्गत पट्टा इन वन विभाग के अधिकारियों से नहीं मिलेगा. जन सुनवाई में अनुमंडल पदाधिकारी अजय रजक ने कहा कि अनुमंडल कार्यालय दावों की अनुशंसा कर जिला को भेज देता है. अब तक जिले में 200 से 250 व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकार के आवेदन आये हैं.

 

उन्होंने आगामी 9 अगस्तग को आदिवासी दिवस के दिन पट्टा वितरण करने की बात कही. जनसुवाई में सामाजिक और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता सुनील मिंज, दीपक बाड़ा, भूखन सिंह, कविता सिंह खरवार, श्यामा सिंह, महावीर परहिया, बालकी सिंह, मनीता कुमारी खरवार सहित काफी संख्याश में ग्रामीण मौजूद थे.

 

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