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रांची-हटिया स्टेशन पर घटेगा लोड, लोधमा-पिस्का लिंक रेल लाइन को मिली मंजूरी

रांची और हटिया रेलवे स्टेशन पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. करीब 17 किलोमीटर लंबी लोधमा-पिस्का लिंक रेल लाइन परियोजना को हरी झंडी मिल गई है. इस परियोजना को गति देने के लिए झारखंड सरकार ने सरकारी भूमि के हस्तांतरण को भी मंजूरी दे दी है. इस संबंध में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है.
 
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Ranchi :  रांची और हटिया रेलवे स्टेशन पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. करीब 17 किलोमीटर लंबी लोधमा-पिस्का लिंक रेल लाइन परियोजना को हरी झंडी मिल गई है. इस परियोजना को गति देने के लिए झारखंड सरकार ने सरकारी भूमि के हस्तांतरण को भी मंजूरी दे दी है. इस संबंध में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है.

 

इस परियोजना के तहत खूंटी जिले के कर्रा अंचल के दो मौजा (काटमकुकू और कुलहुटू) की कुल 11.635 एकड़ सरकारी जमीन दक्षिण पूर्व रेलवे को सशुल्क स्थायी रूप से सौंपी जाएगी. हस्तांतरित की जाने वाली इस भूमि में गैरमजरुआ खास के साथ-साथ रास्ता, मसना और सरना जैसी गैरमजरुआ आम श्रेणियां भी शामिल हैं.

 

भूमि हस्तांतरण के बदले दक्षिण पूर्व रेलवे को लगभग 17.81 रुपये का भुगतान करना होगा. इस राशि में जमीन की सलामी, वार्षिक लगान का पूंजीकृत मूल्य और उस पर लगने वाला 145 प्रतिशत सेस शामिल है, जिसे संबंधित उपायुक्त कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य होगा.

 

 

लोधमा-पिस्का लिंक लाइन मुख्य रूप से एक रेलवे बाईपास के तौर पर काम करेगी, जिससे राउरकेला की तरफ से आने वाली और टोरी व उत्तर भारत की ओर जाने वाली मालगाड़ियों तथा कुछ लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों को रांची और हटिया स्टेशनों के मुख्य मार्ग से नहीं गुजरना पड़ेगा.

 

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह बाईपास ठीक उसी तरह काम करेगा जैसे किसी शहर के बाहर बनी सड़क शहर के अंदरूनी यातायात को नियंत्रित करती है. इससे ट्रेनों के ठहराव और क्रॉसिंग में लगने वाले समय की बचत होगी और मालगाड़ियों का परिचालन भी तेज हो सकेगा.

 

 खूंटी के उपायुक्त को सभी राजस्व अभिलेखों के सत्यापन का निर्देश दिया गया है, जबकि निबंधन और मुद्रांक शुल्क का पूरा खर्च रेलवे द्वारा उठाया जाएगा. सरकार की शर्त के अनुसार, यदि अगले 12 महीनों के भीतर इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हुआ, तो हस्तांतरित भूमि स्वतः ही राजस्व विभाग के पास वापस चली जाएगी.

 

 

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