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सरकार ने हाईकोर्ट को बताया, अध्यादेश पर नियुक्त मदरसा शिक्षकों को मिलेगा पेंशन

एकीकृत बिहार में अध्यादेश के माध्यम से नियुक्त मदरसा शिक्षकों को पेंशन का लाभ मिलेगा. मोहम्मद इजामुल हक एवं अन्य सेवानिवृत कर्मियों की ओर से पेंशन मामले में दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार ने इसकी जानकारी हाईकोर्ट को दी.
 
  • स्कूली शिक्षा सचिव हुए हाजिर
  • अवमानना याचिका  ड्रॉप

Ranchi :  एकीकृत बिहार में अध्यादेश के माध्यम से नियुक्त मदरसा शिक्षकों को पेंशन का लाभ मिलेगा. मोहम्मद इजामुल हक एवं अन्य सेवानिवृत कर्मियों की ओर से पेंशन मामले में दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार ने इसकी जानकारी हाईकोर्ट को दी.

 

 सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने कोर्ट को बताया कि प्रार्थियों के पेंशन से संबंधित पेपर संबंधित विभाग को भेज दिए गए हैं. प्रार्थी वहां जाकर पेंशन से संबंधित अपना दावा निष्पादित कर सकते हैं.

 

सरकार का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने अवमानना याचिका को समाप्त (ड्रॉप) कर दिया. कोर्ट के आदेश के आलोक में बीते शुक्रवार को राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट में हाजिर हुए.

 

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने बताया कि कोर्ट के आदेश के आलोक में इन मदरसा शिक्षकों को पेंशन का लाभ दिया जाएगा, यह लोग सिर्फ वेतन के ही हकदार थे.

 

एकीकृत बिहार में जिस अध्यादेश के माध्यम से इन मदरसा शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही नहीं ठहराया था और उसे असवैधानिक बताया था.

 

हालांकि, राज्य सरकार ने पॉलिसी के तहत इन्हें पेंशन देने का निर्णय लिया. ये राज्य सरकार के कर्मी नहीं थे. इसलिए राज्य सरकार के कर्मी की तरह इन्हें सारी सुविधाएं देय नहीं है. ये सिर्फ वेतन के ही हकदार थे.

 

लेकिन वर्ष 2014 के सरकार के नोटिफिकेशन के तहत इन्हें भी पेंशन का लाभ देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है.

स्कूली शिक्षा सचिव को हुआ था अवमानना नोटिस 

बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मामले में अवमानना नोटिस जारी कर शिक्षा सचिव को तलब किया था. कोर्ट ने उनसे पूछा था कि इसी मामले से संबंधित रिट याचिका के 13 जून 2024 को पारित आदेश का अब तक पालन क्यों नहीं हुआ.

 

अदालत ने उनसे पूछा था कि आदेश की अवहेलना करने पर उनके विरुद्ध आरोप तय क्यों न किए जाएं. उन्हें व्यक्तिगत उपस्थित होने का आदेश दिया था.

 

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