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मझगांव : कुमारडुंगी के मुंडासाई में जल संकट, नदी का पानी पी रहे 500 लोग

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Majhgaon (Md Wasi) : पश्चिम सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी प्रखंड अंतर्गत ईठर मुंडासाई गांव में केंद्र सरकार और राज्य सरकार का पानी पहुंचाने का दावा खोखला साबित हो रहा है. जनवरी में ही लोगों का हलक सूखने लगा है. स्थानीय ग्रामीण पानी के लिए रोजाना जद्दोजहद करने को विवश हैं. मुंडासाई गांव में रोज सुबह नदी किनारे पानी के लिए महिलाओं की भीड़ जुटती है. भीड़ इतनी रहती है कि माहौल बाजार सा लगने लगता है. भीड़ होने के कारण पानी भरने के लिए हल्ला-गुल्ला भी मचने लगता है. पानी भरने को लेकर आपस में झगड़े भी काफी होते हैं. पर यह झगड़ा नदी तक ही सीमित रहता है. इसे भी पढ़ें : निलंबित">https://lagatar.in/hearing-on-bail-plea-of-suspended-ias-pooja-singhal-now-in-sc-on-march-11/">निलंबित

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एक किलोमीटर दूर से सिर पर ढोकर लाना पड़ता है पानी

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alt="" width="600" height="400" /> जब महिलाएं सिर पर पानी से भरे बर्तन को ढोकर एक किलोमीटर सफर करती हैं तो सारा गुस्सा भूल जाती हैं. इस तरह की समस्या से मुंडासाई गांव पिछले तीन माह से परेशान है. लगभग पांच सौ की संख्या वाले इस गांव में मात्र एक चापाकल था. इसे हर घर नल जल योजना के लिए लोगों ने तोड़ दिया. पुराने चापाकल के समीप ही नया चापाकल लगाने के लिए खुदाई शुरू की. इससे पानी देने वाला पुराना चापाकल अंदर धंस गया. जब ग्रामीणों ने ठेकेदार से समस्या बतायी तो वह छुपकर वहां से भाग गया. अब गांव वाले एक किलोमीटर दूर स्थित सरायगुटु नामक स्थान में नाला किनारे गड्ढा कर पानी पीने को मजबूर हैं. यह भी गांव से दूर होने के कारण सभी महिलाएं एक साथ पानी लाने जाती हैं. इसे भी पढ़ें : औरंगाबाद">https://lagatar.in/aurangabad-police-gets-success-rewarded-criminal-gupteshwar-alias-budha-paswan-arrested-from-bengaluru/">औरंगाबाद

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चुआं बनाकर पानी भरती हैं महिलाएं

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alt="" width="600" height="400" /> वहां नाले में स्थित बालू में चुआं बनाकर पानी भरती हैं. उसके बाद पानी ढोकर घुटने भर नाले में भरे पानी को पार करते हैं. वहां थोड़ी पथरीली चट्टान पार कर पगडंडी होते हुए घर पहुंचते हैं. गांव वालों ने बताया कि पानी जैसी समस्या के लिए स्थानीय सांसद और विधायक सहित पंचायत जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान आकृष्ट नहीं किया है. आने वाले चुनाव में इन प्रतिनिधियों को सबक सिखाई जाएगी. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-alumni-students-of-mrs-kmpm-1985-batch-got-together/">आदित्यपुर

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पानी लाने में एक घंटा लगता है

मैं 7वीं कक्षा का छात्रा हुं,पानी लाने सुबह से जाना पड़ता है. फिर वहां से एक बर्तन पानी लाने में एक घंटा लगता है. इसलिए पिछले दो माह से स्कूल जाना छोड़ दिए हैं.

सोमवारी बोयपाई, छात्रा 

पानी की वजह से स्कूल नहीं जाती

अभी मैं स्कूल नहीं जा रही हूं, क्योंकि घर में पानी लाने वाला कोई नहीं है. पानी लाना जरूरी है. ज्यादा दिन स्कूल नहीं जाऊंगी तो नाम काट देगा. इसलिए चापाकल जल्दी बना दें.

सबिता बोयपाई, छात्रा 

बूढ़ी हूं, छोटे बर्तन में लाती हूं पानी

मैं बुढ़ी हो गई हूं. अब इस उम्र में एक किलोमीटर से पानी लाकर खाना बना पाना मुश्किल है. इसलिए छोटे बर्तन में पानी लेकर आती हूं. पीने व खाना के लिए हो जाता है.

बिरांग कुई, ग्रामीण 

बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं

गांव में पानी की समस्या आ गई है. गंदा पानी पीने से लोगों का सेहद खराब हो रहा है. दूर से पानी लाने के कारण महिलाएं काम पर एवं बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं.

सावित्री बोयपाई, ग्रामीण 

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