Ranchi : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने राज्य में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण के उन्मूलन और मां से शिशु में होने वाले प्रसार को रोकने के लिए सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
उन्होंने जिला नोडल पदाधिकारियों और जिला आरसीएचओ को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस-बी जांच शत-प्रतिशत सुनिश्चित की जाए. जांच की प्रविष्टि एमसीपी कार्ड में अनिवार्य रूप से दर्ज करने को भी कहा गया है.
निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रसव केंद्रों के लेबर रूम में हेपेटाइटिस-बी की बर्थ डोज और इम्यूनोग्लोबुलिन टीका हर समय उपलब्ध रहे. यदि कोई गर्भवती महिला हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव पाई जाती है, तो उसके नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर दोनों टीके लगाना अनिवार्य होगा.
मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. वर्टिकल ट्रांसमिशन रोकने के लिए जन्म के बाद के पहले 24 घंटे को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है.
आंकड़ों की पारदर्शिता के लिए गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग और नवजात शिशुओं के टीकाकरण की रिपोर्टिंग केंद्र सरकार के आरसीएच पोर्टल पर अनिवार्य रूप से करने को कहा गया है. विभाग ने इस अभियान के लिए वार्षिक लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं, जिन्हें भारत सरकार के की-डिलिवरेबल के रूप में चिन्हित किया गया है.
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए रिम्स, रांची को मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर के रूप में चिन्हित किया गया है, जबकि सभी जिला अस्पतालों और पांच मेडिकल कॉलेजों को ट्रीटमेंट सेंटर के रूप में सक्रिय किया गया है.
कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए 19 से 22 जनवरी तक राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया था, जिसमें विशेषज्ञों ने जिला स्तरीय अधिकारियों और चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया. विभाग का कहना है कि यह पहल सतत विकास लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
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