Ranchi News: पश्चिमी सिंहभूम की रहने वाली मनीषा बोदरा डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में ‘हो’ समुदाय से पहली शोधार्थी है. जो आदिवासी समाज के लिए एक मिसाल है.
‘लगातार मीडिया’ से बातचीत में मनीषा बोदरा ने बताया कि वो मैट्रिक की परीक्षा में 2014 में 87 प्रतिशत अंक लाकर चक्रधरपुर टॉपर रही हैं. इसके बाद आर्टस विषय में 2016 में इंटर में 68 प्रतिशत लाकर प्रथम श्रेणी से उतीर्ण किया.
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वे स्नातक महिला कॉलेज चाईबासा से साल 2019 में ग्रेजुएशन प्रथम श्रेणी से पास की. 2022 में कोल्हान विश्वविद्यालय से संस्कृत विषय में स्नाकोतर (एम.ए) गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं. उन्होंने साल 2021 और 2023 में नेट क्वालिफाई किया है.
फिलहाल, मनीषा बोदरा श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत विषय में प्रोफेसर डॉ राहुल कुमार के निर्देशन में पीएचडी कर रही है. वह संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की जानकार है.
मनीषा बोदरा ने बताया कि पूरा परिवार खेती बारी से जुड़ा है. उनके पिता गणेश चंद्र बोदरा सोनवा प्रखंड के भालु रूंगी गांव के उपमुखिया हैं. वहीं, माता गृहणी हैं.
मनीषा के अनुसार, संस्कृत भारती संस्था से संस्कृत पढ़ने, लिखने और बोलने की प्रेरणा मिली. इसके बाद हमेशा संस्कृत की प्रत्येक स्लोक को याद कर बेहतरीन तरीके से बोलने लगी. जिसे हमेशा बोलचाल में उपयोग करती है.
मनीषा बोदरा ने बताया कि संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किया जा रहा है. इसे बोलचाल में लाया जा रहा है. रांची में विशेष प्रशिक्षण चलाए जा रहे है. जिसमें सैकड़ों विद्यार्थी संस्कृत भाषा में बोलचाल में प्रयोग करते है. इस भाषा को सिखाने के लिए विशेष ट्रेनिंग चलाए जा रहे है.
संस्कृत भाषा नौकरी करने के लिए एक विषय नहीं है. इसमें संसार के सभी वेद निहित है. यह भारत की प्राचीन भाषा भी है. भारत की संस्कृति को जानने के लिए संस्कृत को जानना चाहिए.
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