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26 जून से 2 जुलाई तक माओवादियों का दमन विरोधी सप्ताह, एक करोड़ इनामी समेत कई नक्सली अब भी सक्रिय

प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन 26 जून से 2 जुलाई तक दमन विरोधी सप्ताह मनायेगा. इसे लेकर झारखंड पुलिस मुख्यालय पूरी तरह अलर्ट मोड में है. राज्य के सभी नक्सल प्रभावित जिलों के एसपी, रेल एसपी, सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है.
 

Ranchi :  प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन 26 जून से 2 जुलाई तक दमन विरोधी सप्ताह मनायेगा. इसे लेकर झारखंड पुलिस मुख्यालय पूरी तरह अलर्ट मोड में है. राज्य के सभी नक्सल प्रभावित जिलों के एसपी, रेल एसपी, सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है. 

 

जंगलों में कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं, जबकि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जा रही है. हालांकि एक समय झारखंड को माओवादियों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन लगातार सुरक्षा अभियानों के बाद संगठन की ताकत काफी कमजोर हुई है. इसके बावजूद कई बड़े इनामी नक्सली अब भी पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं. 

 

 

कभी लाल आतंक का गढ़ था झारखंड

पलामू, लातेहार, चतरा, गढ़वा, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा-पोड़ाहाट के जंगल कभी माओवादियों के सुरक्षित ठिकाने माने जाते थे. पुलिस कैंपों पर हमले, बारूदी सुरंग विस्फोट, रेलवे ट्रैक उड़ाना, लेवी वसूली और जन अदालत जैसी घटनाएं आम थीं.

 

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों के बड़े अभियानों ने संगठन को गहरा झटका दिया है. कई शीर्ष कमांडर मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं. इसके बावजूद संगठन के कुछ बड़े नेता अब भी जंगलों में सक्रिय बताए जाते हैं.

 

एक करोड़ के इनामी नक्सली अब भी पुलिस की रडार पर

झारखंड पुलिस की सूची में सबसे ऊपर मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सागर और असीम मंडल उर्फ आकाश का नाम है. दोनों पर एक-एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है. ये दोनों माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल माने जाते हैं.

 

वहीं अजय महतो उर्फ टाइगर पर 25 लाख रुपये, जबकि मोछु मुर्मू, संजय महतो, सचिन मार्डी, नितेश यादव और रविंद्र गंझू पर 15-15 लाख रुपये का इनाम घोषित है. इसके अलावा मनोहर गंझू, गोदराय यादव, सालुका कायम, पुष्पा महतो, चंदन लोहरा और मीता उर्फ नयनतारा जैसे जोनल कमांडरों पर 10-10 लाख रुपये का इनाम है.

 

पलामू-लातेहार में अब भी चुनौती

हालांकि पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियां काफी सीमित हुई हैं, लेकिन पुलिस की नजर अब भी पलामू, लातेहार, चतरा और गढ़वा के सीमावर्ती जंगलों पर बनी हुई है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि दमन विरोधी सप्ताह के दौरान माओवादी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए पोस्टरबाजी, बैनर, पर्चा वितरण, सड़क निर्माण कार्यों में बाधा या आईईडी लगाने जैसी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं. 

 

पुलिस मुख्यालय ने जारी किया अलर्ट

सूत्रों के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को रेलवे ट्रैक, मोबाइल टावर, निर्माणाधीन सड़क परियोजनाओं, पुलिस कैंपों और संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया है. जंगल क्षेत्रों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं और खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है.

 

पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि माओवादी संगठन पहले की तुलना में काफी कमजोर हुआ है. लेकिन दमन विरोधी सप्ताह को देखते हुए किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. 

 

 

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