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अब बाजार तय करेगा कोयले की कीमत, झारखंड को हो सकता है लाभ, पर बिजली-उद्योगों की बढ़ सकती है मुश्किलें

केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए कोल एक्सचेंज नियम-2026 को अधिसूचित कर दिया है. इसके तहत अब कोयले की कीमतें पहले की तरह सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां तय नहीं करेंगी, बल्कि मांग और आपूर्ति के आधार पर बाजार में निर्धारित होंगी.
 
  • झाऱखंड में कोयला उत्पादन बढ़ने की संभावना
  • रॉयल्टी और खनिज राजस्व में हो सकती है वृद्धि

New Delhi/Ranchi :  केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए कोल एक्सचेंज नियम-2026 को अधिसूचित कर दिया है. इसके तहत अब कोयले की कीमतें पहले की तरह सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां तय नहीं करेंगी, बल्कि मांग और आपूर्ति के आधार पर बाजार में निर्धारित होंगी.

 

सरकार का दावा है कि इससे कोयला क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और निवेश आकर्षित करने वाला बनेगा. भारत की ऊर्जा व्यवस्था आज भी बड़े पैमाने पर कोयले पर निर्भर है. वित्तीय वर्ष 2015-16 में बिजलीघरों को 478 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति हुई थी, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 870 मिलियन टन तक पहुंच गई. 

 

कैसे काम करेगी नई व्यवस्था

कोल एक्सचेंज नियम-2026 के तहत कोयले की खरीद-बिक्री के लिए एक संगठित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा. इस प्लेटफॉर्म पर कोयला उत्पादक, खदान संचालक, बिजली कंपनियां, इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग और अन्य खरीदार सीधे भाग ले सकेंगे.

 

नई व्यवस्था में कोयले की कीमत मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होगी. खरीदार और विक्रेता खुली बोली के माध्यम से सौदे कर सकेंगे. विभिन्न ग्रेड के कोयले के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारित होंगे. निजी और सरकारी दोनों क्षेत्र की कंपनियां इसमें भाग ले सकेंगी. 

 

झारखंड का बढ़ सकता है राजस्व

झारखंड देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल है. राज्य में सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल सहित कई बड़ी कोयला कंपनियां संचालित हैं. यदि बाजार में कोयले की कीमतें बढ़ती हैं तो रॉयल्टी और अन्य शुल्क के माध्यम से राज्य सरकार की आय में भी वृद्धि हो सकती है.

 

बाजार आधारित मूल्य निर्धारण से निजी निवेशकों को अधिक आकर्षित किया जा सकता है. इससे नई खदानों के विकास, कोयला गैसीफिकेशन और कोयला आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ने की संभावना है. बाजार आधारित व्यवस्था निवेशकों को इस क्षेत्र में पूंजी लगाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है.

 

 

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