Ranchi News: झारखंड में गंदे पानी के निपटान के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे का अभाव है. सीपीसीबी के आंकड़ों पर आधारित एक आरटीआई में खुलासा हुआ है कि राज्य की सीवेज शोधन क्षमता में 67.4 प्रतिशत की कमी है. इसके कारण भारी मात्रा में सीवेज बिना साफ हुए सीधे गंगा और उसकी सहायक नदियों में जा रहा है.
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रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में हर दिन 473 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है. इसे साफ करने की मौजूदा क्षमता महज 33 प्रतिशत (154 एमएलडी) ही है. सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता की इतनी बड़ी कमी के कारण झारखंड, गंगा किनारे बसे अन्य सभी राज्यों में सबसे निचले पायदान पर है. राज्य में सिर्फ 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ही चालू स्थिति में हैं. वहीं पानी की जांच के लिए पूरे झारखंड में मात्र चार निगरानी केंद्र काम कर रहे हैं.
झारखंड के अलावा अन्य गंगा राज्यों की स्थिति देखें तो बिहार में 52.3 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 50 प्रतिशत सीवेज ट्रीटमेंट का गैप है, जबकि उत्तराखंड में यह 22.3 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में सबसे कम 12.1 प्रतिशत है.
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