Bhopal : जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी काउंसिल की बैठक भोपाल में हुई. सूत्रो के अनुसार बैठक में काफी गहमा गहमी रही. खबर है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार पर बरसे.
#WATCH | Bhopal, MP: At the National Governing Body meeting of Jamiat Ulama-i-Hind, its president, Maulana Mahmood Madani says, "The current situation of the country is very sensitive and concerning. Sadly, a particular community is being forcibly targeted, while other… pic.twitter.com/JERzNucQgF
— ANI (@ANI) November 29, 2025
कोर्ट द्वारा हाल में दिये गये कुछ फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा कि इन फैसलों के कारण देश में चल रहे संवेदनशील मामलों में समुदाय(मुस्लिम) के बीच मायूसी बढ़ रही है. कहा कि निराशा किसी भी कौम के लिए जहर के समान है.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, बाबरी मस्जिद और तीन तलाक से जुड़े मामलों की बात करें तो इसमें अदालतों के फैसलों ने व्यापक प्रभाव छोड़ा है. आरोप लगाया कि न्यायपालिका सरकार के दबाव में काम कर रही है.
मौलाना मदनी ने कहा कि धर्मस्थल कानून(91) के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद ज्ञानवापी और मथुरा से जुड़े मामले अदालतों में सुने जा रहे, यह कानून की मूल भावना के विपरीत है.
इसमें कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को मौजूद किसी भी उपासना स्थल की धार्मिक प्रकृति के परिवर्तन के संबंध में किसी भी न्यायालय के समक्ष लंबित कोई भी मुकदमा या कानूनी कार्यवाही समाप्त हो जायेगी और कोई नया मुकदमा या कानूनी कार्यवाही शुरू नहीं की जायेगी.
मौलाना मदनी ने यहां तक कहा कि सुप्रीम कोर्ट तभी सुप्रीम कहलाने का हकदार है, जब वह संविधान की रोशनी में फैसले दे. कहा कि अगर अदालतें संविधान से हटकर फैसले देने लगेंगी, तो फिर सुप्रीम कहलाने का हक कहां रह जाता है.
जिहाद का जिक्र करते हुए मौलाना मदनी ने कहा, आज सरकार और मीडिया एक पवित्र शब्द को पूरी तरह गलत तरीके से दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं.
आरोप लगाया कि जिहाद को लव जिहाद, थूक जिहाद, जमीन जिहाद जैसे शब्दों के साथ जोड़ा जा रहा है, जबकि जिहाद दूसरों की भलाई और बेहतरी के लिए बताया गया है. साथ ही उन्होंने कहा, जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा.
मौलाना मदनी के अनुसार वर्तमान समय में देश में 10 प्रतिशत लोग मुसलमानों के पक्ष में खड़े हैं. जबकि 30 प्रतिशत लोग मुसलमानों के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि बाकी 60 प्रतिशत लोग खामोश हैं.
मौलाना ने मुसलमानों से अपील की कि वे इन 60 प्रतिशत खामोश लोगों से संवाद करें. अगर यह वर्ग मुसलमानों के खिलाफ हो गया तो देश में गंभीर संकट पैदा हो सकता है.
उन्होंने राज्यो में जारी SIR का भी जिक्र किया कहा कि यह एक गंभीर मामला है. इसमें न्यायपूर्ण तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए.
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