- 30 सितंबर तक समझौते योग्य मामलों की सूची तैयार करने का निर्देश
- वैवाहिक विवाद से लेकर चेक बाउंस और जमीन मामलों तक होंगे शामिल
Ranchi News : झारखंड में लंबित मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए ‘मेडिएशन फॉर द नेशन 3.0’ अभियान चलाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट की मेडिएशन एंड कन्सिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी (एमसीपीसी) की ओर से शुरू किए गए 90 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत तालुका कोर्ट, जिला अदालत, ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट में लंबित ऐसे मामलों की पहचान की जाएगी, जिनमें आपसी समझौते की गुंजाइश है.
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इस संबंध में प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी नीरज कुमार श्रीवास्तव ने एक सितंबर को राज्य के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक को पत्र भेजा है. पत्र में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) ने एक पत्र का हवाला देते हुए सभी संबंधित विभागों से 30 सितंबर 2026 तक ऐसे लंबित मामलों और वादों को अधिक से अधिक संख्या में चिन्हित कर उनकी सूची झालसा के सदस्य सचिव को उपलब्ध कराने को कहा गया है.
अभियान के तहत सबसे पहले समझौते की संभावना वाले लंबित मामलों की पहचान की जाएगी. इसके बाद प्री-मेडिएशन स्क्रीनिंग होगी और संबंधित पक्षों को नोटिस या सूचना देकर उपयुक्त मामलों को मेडिएशन सेंटर भेजा जाएगा. चिन्हित मामलों की सूची अदालत, बार और संबंधित आधिकारिक वेबसाइटों पर प्रकाशित करने का भी प्रावधान है.
इस अभियान में वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, चेक बाउंस, समझौता योग्य आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, कर्ज वसूली और सरफेसी मामले, डिक्री के निष्पादन से जुड़े मामले, मध्यस्थता अधिनियम के तहत मामले, व्यावसायिक विवाद, सेवा मामले, बंटवारा, बेदखली, भूमि अधिग्रहण, श्रम कानून से जुड़े मामले और अन्य उपयुक्त दीवानी मामलों को शामिल किया जा सकता है.
अभियान के दौरान पक्षकारों की सुविधा के अनुसार मेडिएशन ऑफलाइन, ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में कराया जा सकेगा. सातों दिन मेडिएशन की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. ऑनलाइन माध्यम से शामिल होने के इच्छुक पक्षकारों को भी इसकी अनुमति दी जाएगी और तालुका या जिला विधिक सेवा प्राधिकार ऑनलाइन मेडिएशन में सहयोग करेगा.
इसके अलावा मेडिएशन कमेटी को राज्य के न्यायाधीशों के लिए रेफरल जज ट्रेनिंग आयोजित करने का निर्देश दिया गया है. अभियान के दौरान मामलों के रेफरल, सफल और असफल मेडिएशन और शुरू नहीं हो सके मामलों का प्रभाव आकलन भी किया जाएगा. अभियान पूरा होने के 30 दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट एमसीपीसी को भेजनी होगी.
30 सितंबर तक मामलों की पहचान, इसके बाद रेफरल की प्रक्रिया
एसओपी के अनुसार अभियान के शुरुआती चरण में लंबित मामलों की पहचान और प्री-मेडिएशन स्क्रीनिंग की जाएगी. इसके बाद पक्षकारों को सूचना देकर उपयुक्त मामलों को मेडिएशन सेंटर भेजा जाएगा. चिन्हित और रेफर किए गए मामलों का निर्धारित प्रारूप में डेटा सुप्रीम कोर्ट की एमसीपीसी को भेजा जाएगा.
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