- सप्लाई में देरी से प्रोडक्शन प्लानिंग पर असर
- ईंधन और फ्रेट महंगा होने से बढ़ी लागत, एमएसएमई सेक्टर पर पड़ रहा दबाव
- टैक्स और ड्यूटी में अस्थायी राहत की मांग
Piyush Gautam
Ranchi : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच झारखंड के उद्योगों पर पड़ रहे असर को लेकर फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के चेयरमैन आदित्य मल्होत्रा ने लगातार न्यूज से खास बातचीत की है. उन्होंने बताया कि कच्चा माल समय पर नहीं पहुंचने से प्रोडक्शन प्लानिंग प्रभावित हो रही है, बढ़ते फ्रेट चार्ज से लागत में इजाफा हो रहा है. अगर सप्लाई में देरी जारी रही तो एमएसएमई सेक्टर पर ज्यादा दबाव बढ़ सकता है.
पेश है बातचीत के अंश -
प्रश्न: ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध का झारखंड के उद्योगों पर क्या असर पड़ा है?
उत्तर: तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव से ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ी है, वैश्विक अनिश्चितता से बाजार प्रभावित हुआ है और आयात महंगे होने का दबाव है.
प्रश्न: युद्ध का असर अभी शुरुआती है या बड़ा झटका लग चुका है?
उत्तर: अभी इसका असर शुरुआती और सीमित है, लेकिन वैश्विक स्थिति लंबी खिंचती है तो लागत, सप्लाई और मांग पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है.
प्रश्न: कच्चे माल की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?
उत्तर : कच्चे माल की कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. खासकर ईंधन महंगा होने से लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ी है, जिसका असर स्टील, माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ रहा है.
प्रश्न: आयात पर निर्भर उद्योगों को क्या परेशानी हो रही है?
उत्तर : उद्योगों को शिपिंग लागत बढ़ने, सप्लाई में देरी और अनिश्चित डिलीवरी टाइमलाइन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. कच्चा माल समय पर नहीं पहुंचने से प्रोडक्शन प्लानिंग प्रभावित हो रही है, वहीं फ्रेट चार्ज बढ़ने से लागत भी बढ़ रही है. अभी असर सीमित है, लेकिन लगातार देरी रहने पर एमएसएमई सेक्टर पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है.
प्रश्न: स्टील, माइनिंग और पावर सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर किस रूप में दिख रहा है?
उत्तर: स्टील सेक्टर में कच्चा माल और फ्रेट महंगा हुआ है, माइनिंग में निर्यात मांग और कीमतों में उतार-चढ़ाव दिख रहा है, जबकि पावर सेक्टर में ईंधन लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च पर दबाव आया है.
प्रश्न: क्या उत्पादन घटाना पड़ा है या शिफ्ट कम करनी पड़ी है?
उत्तर: अभी व्यापक स्तर पर उत्पादन घटाने या शिफ्ट कम करने की स्थिति नहीं आई है. हालांकि, कुछ एमएसएमई इकाइयों में लागत और सप्लाई की अनिश्चितता के कारण आंशिक रूप से उत्पादन समायोजन (जैसे शिफ्ट में बदलाव या धीमी गति) देखा जा रहा है.
प्रश्न: मजदूरों और रोजगार पर इस संकट का कितना असर पड़ रहा है?
उत्तर: ओवरटाइम या अस्थायी काम में कमी देखी जा रही है. फिलहाल बड़े पैमाने पर छंटनी की स्थिति नहीं है. कुछ कंपनियां लागत नियंत्रण और अनिश्चितता के कारण नई भर्तियों को टाल रही हैं और कॉन्ट्रैक्ट वर्क में सावधानी बरत रही हैं.
प्रश्न: उद्योग सरकार से क्या राहत चाहते हैं?
उत्तर:
1) सबसे पहले, ईंधन और बिजली की बढ़ती लागत को कम करने के लिए टैक्स और ड्यूटी में अस्थायी राहत दी जाए, ताकि उत्पादन लागत नियंत्रित रहे.
2) खासकर एमएसएमई सेक्टर के लिए सस्ती दर पर लोन और वर्किंग कैपिटल सपोर्ट उपलब्ध कराया जाए, क्योंकि इस समय कैश फ्लो पर दबाव है.
3) लॉजिस्टिक्स और फ्रेट चार्ज में बढ़ोतरी को देखते हुए कुछ सब्सिडी या सहायता दी जाए, ताकि सप्लाई चेन सुचारु बनी रहे.
4) इसके अलावा, टैक्स भुगतान में समय की छूट और अनुपालन में थोड़ी लचीलापन दिया जाए, ताकि उद्योगों को राहत मिल सके.
प्रश्न: झारखंड की इंडस्ट्री को ऐसे वैश्विक संकट से बचाने के लिए क्या कदम जरूरी हैं?
उत्तर :
1) इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए उद्योगों को कच्चे माल और सप्लाई के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने होंगे, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो.
2) लोकल सोर्सिंग और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देकर बाहरी झटकों का असर कम किया जा सकता है.
3) सरकार को लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टोरेज सिस्टम मजबूत करना होगा, ताकि सप्लाई चेन बाधित न हो.
4) रिस्क मैनेजमेंट, लागत नियंत्रण और डिजिटल प्लानिंग पर ध्यान देना होगा, ताकि ऐसी अनिश्चित परिस्थितियों में भी उद्योग स्थिर रह सकें.
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