- बांग्लादेश में तेल की राशनिंग चालू कर दी गयी है
- पाकिस्तान में स्कूल दो सप्ताह के लिए बंद, सप्ताह में कार्यालय चार दिन खुलेंगे
- कच्चे तेल की कीमतें 120-140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं.
- फ्रांस और जर्मनी में लोग पंपों पर पैनिक बाइंग में जुटे
New Delhi : मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण भारत सहित दुनिया के कई देश तेल संकट से हलकान हैं. सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति चेन बाधित हो गयी है. आपूर्ति की अनिश्चितता की वजह से नागरिकों में चिंता का माहौल है. वे घबरा कर तेल खरीदने के लिए पेट्रोल पंपों में नाहक कतार लगा रहे हैं.
जानकारी के अनुसार पाकिस्तान और बांग्लादेश में स्थिति काफी गंभीर हो चली है. पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें 55 रुपये प्रति लीटर बढ़ गयी हैं. शहबाज शरीफ की सरकार ने ईंधन बचाने की कवायद शुरू कर दी है. खबर है कि सभी स्कूल दो सप्ताह के लिए बंद कर दिये गये हैं. सरकारी कार्यालय सप्ताह में केवल चार दिन खोले जा रहे हैं. वर्क फ्रोम होम लागू किया जा रहा है.
बांग्लादेश की बात करें तो वहां तेल की राशनिंग चालू कर दी गयी है. मोटरसाइकिल के लिए 2 और कारों के लिए 10 लीटर की दैनिक सीमा तय किये जाने की खबर है. पेट्रोल पंपों पर रसीदों की जांच की जा रही हैं.
अहम बात यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बंद होने के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में 25 फीसदी तक का उछाल आया है. इस कारण विभिन्न देशों की सरकारें राशनिंग, स्कूलों में छुट्टी सहित और सरकारी कामकाज में वर्क फ्रोम होम जैसे कदम उठा रही हैं. .
दुनिया का लगभग 31 प्रतिशत समुद्री कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से गुजरते हैं. जंग के कारण यह रास्ता बाधित है. यानी ऊर्जा व्यापार पूरी तरह अस्थिर हो गया है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर संघर्ष लंबा चला तो कच्चे तेल की कीमतें 120-140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं. अहम खबर यह है कि फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देश भी मिडिल ईस्ट की जंग से प्रभावित हैं. इन देशों में तेल की कीमतें बढ़ गयी है.फ्रांस और जर्मनी में लोग पंपों पर लंबी कतार लगा कर पैनिक बाइंग में जुट गये हैं. उधर वियतनाम ने जनता से ईंधन बचाने की अपील की है.
पोलैंड में पेट्रोल की कीमतों में 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अमेरिका के फ्लोरिडा और लुइसियाना में गैस पंपों पर कीमतें 11 सेंट तक बढ़ गयी हैं. दुनिया भर की सरकारें इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपनाने का सुझाव दे रही हैं. अपने नागरिकों से पैनिक बाइंग न करने और ऊर्जा बचाने की अपील कर रही हैं.
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