- यूआईडीएआई के डायरेक्टर को बनाया प्रतिवादी
- मां को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश
- झालसा सचिव से मांगी रिपोर्ट
- एसडीपीओ गुमला और अहतू थाना प्रभारी कोर्ट में हुए हाजिर
- बच्ची की मां के साथ मारपीट की प्राथमिकी क्यों नहीं हुई
Ranchi : गुमला से लापता बच्ची के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति एके राय की कोर्ट ने ऑनलाइन उपस्थित गुमला एसपी को फटकार लगाई है.
कोर्ट ने उनसे पूछा कि बच्ची की मां, जो इस केस की प्रार्थी है, के साथ डायन-बिसाही कहकर मारपीट की गई है. इस संबंध में अबतक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई?
इस पर एसपी ने कोर्ट को बताया कि पुलिस के हस्तक्षेप से मारपीट की घटना को रोका गया. बच्ची की मां ने पारिवारिक मामला बताते हुए प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई. कोर्ट ने एसपी को बच्ची की मां को तुरंत सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने बच्ची के आधार कार्ड ट्रेस कराने के पुलिस के आवेदन के संबंध में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकार (यूआईडीएआई) के डायरेक्टर को प्रतिवादी बनाया है.
सुनवाई के दौरान एएसजीआई प्रशांत पल्लव से कोर्ट ने कहा है कि लापता बच्ची के संबंध में संबंधित थाना पुलिस की ओर से 6 फरवरी को बच्ची के आधार कार्ड ट्रेस के लिए आवेदन दिया गया था. कोर्ट ने इस संबंध में क्या कार्रवाई हुई है, बताने को कहा है.
सुनवाई के दौरान झारखंड स्टेट लीगल अथॉरिटी (झालसा) की मेंबर्स सेक्रेटरी ऑनलाइन जुड़ी. कोर्ट ने उन्हें झालसा, गुमला की टीम को भेजकर बच्ची की मां को दी गई धमकी, उसे गांव से निकाले जाने और उसकी सुरक्षा के बारे में जानकारी लेकर कोर्ट को अवगत करने को कहा है.
इससे पहले प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि लापता बच्ची की मां के साथ दुर्व्यवहार किया गया है. सुनवाई के दौरान एसडीपीओ गुमला और अहतू थाना प्रभारी कोर्ट के समक्ष सशरीर उपस्थित थे.
उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि लापता बच्ची की खोज को लेकर एसआईटी गठित की गई है. बच्ची की खोज जारी है. राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता गौरव राज एवं श्रीकांत ने पक्ष रखा.
जबकि प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शैलेश शैलेश पोद्दार ने दलील पेश की. अब मामले की अगली सुनवाई कल यानी गुरुवार को फिर होगी.
क्या है मामला
दरअसल झारखंड हाई कोर्ट में सितंबर 2018 से गुमशुदा गुमला की 6 वर्षीय बच्ची की बरामदगी को लेकर उसकी मां चंद्रमुनि उराइन की ओर से दायर हेवियस कार्पस पर सुनवाई चल रही है.
पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि इस मामले में गहरी अनुसंधान के लिए नई एसआईटी का गठन किया गया है, जिसने दिल्ली जाकर बच्ची की जानकारी लेने की कोशिश की.
बताया गया कि उसकी फोटो जगह-जगह पर अपलोड कराई गई है. दुर्भाग्यवश अभी तक बच्ची बरामद नहीं हुई है. बच्ची की तलाश जारी है. इसी मामले में वर्ष 2023 में गठित एसआईटी ने छापेमारी कर लापता नौ बच्चे बरामद किए थे.
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