Ranchi : झारखंड हाई कोर्ट ने आरआरडीए को नक्शा पास करने के अधिकार को सही ठहराया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जिला परिषद व मुखिया आरआरडीए के डेवलपमेंट एरिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं.
कोर्ट ने मामले में यथा स्थिति (स्टेटस को) बनाए रखने का आदेश दिया है. अब आरआरडीए द्वारा अवैध तरीके से बने भवनों को सील व डिमोलिश करने के मामले में 24 फरवरी को सुनवाई होगी.
कोर्ट ने यह भी कहा है कि आरआरडीए एक टेक्नीकल बॉडी है. वह मास्टर प्लान के तहत काम करती है. मास्टर प्लान के तहत ही नक्शा स्वीकृत करती है. आरआरडीए नक्शा पास कर सकता है. वह मास्टर प्लान के तहत रीजनल डेवलपमेंट का काम करती रहेगी.
उल्लेखनीय है कि इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाया था कि आरआरडीए अपने जिस एक्ट के तहत नक्शा पास करता है, वह मान्य नहीं है.
साथ ही कहा गया था कि आरआरडीए झारखंड पंचायत राज अधिनियम द्वारा शासित क्षेत्रों के भवन निर्माण पर नियंत्रण नहीं रख सकता है. अदालत ने याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों के खिलाफ जारी डिमोलिश और सील आदेशों को रद्द कर दिया था.
राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दी है. जिस पर मुख्य न्यायाधीश की अदालत बुधवार को सुनवाई हुई. राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राजीव रंजन मिश्रा ने आरआरडीए का पक्ष रखा.
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