Ranchi News: झारखंड के आदिवासी बहुल जिलों में ओबीसी आरक्षण अधिकारों की मांग को लेकर मंगलवार को बुलाया गया पांच जिलों का महाबंद का मिला जुला असर दिखा. 'केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति' के आह्वान पर रांची, गुमला, सिमडेगा, खूंटी और लोहरदगा में इसका असर देखने को मिला. पिछड़ा वर्ग के लोगों ने मुख्य सड़कों पर उतरकर घंटों चक्का जाम किया, जिससे सामान्य जनजीवन और यातायात प्रभावित रहा.
राजधानी रांची के अरगोड़ा चौक पर सुबह नौ बजे से प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे रहे. कुछ देर तक शहर की यातायात व्यवस्था चरमराई रही. वहीं, सिमडेगा, खूंटी और लोहरदगा में अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें शाम तक बंद रहीं.
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बंदी के कारण मंगलवार को नेशनल हाईवे 43 और 143 दिनभर बाधित रहा, जिसके कारण ट्रकों और यात्री बसों की लंबी कतारें लगी रहीं. आवागमन ठप होने से आम यात्रियों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और शिक्षकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को इस जाम से मुक्त रखा था.
आंदोलन के जरिए प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें प्रमुखता से रखीं. उनकी मुख्य मांग जिला नियोजन रोस्टर में ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत सुनिश्चित करने की है. इसके अलावा, आगामी जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम की व्यवस्था करने, पेसा कानून के तहत स्थानीय समुदायों को अधिकार देने और सरकारी नौकरियों से लेकर राजनीति में आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी देने की मांग भी उठाई गई. समिति के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी तेज किया जाएगा.
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