कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने एक बयान जारी कर कहा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत और न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची ही वो न्यायाधीश हैं, जिन्होंने बंगाल और बिहार में अवैध एसआईआर प्रक्रिया को बिना किसी अड़चन के आगे बढ़ने दिया, उन्हें अब इस मामले की सुनवाई से चुपचाप अलग हो जाना चाहिए.
Lagatar Desk
एसआईआर में गड़बड़ी करने के लिए जिम्मेदार मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज (5 अक्टूबर) को सुनवाई होनी है. इस बीच भारत के मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची को सुनवाई से दूर रहने की मांग होने लगी है. यह मांग कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने की है.
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस नरीमन के बयान को भी वर्तमान मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत पर टिप्पणी के तौर पर देख जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जस्टिस उज्जल भुइयां ने हैदराबाद के नलसार में जो टिप्पणी की है, उसे भी मुख्य चुनाव आयुक्त एसआईआर की प्रक्रिया से जोड़ करके देखा जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत.
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर मुंबई में प्रदर्शन कर चुकी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने एक बयान जारी कर कहा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत और न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची ही वो न्यायाधीश हैं, जिन्होंने बंगाल और बिहार में अवैध एसआईआर प्रक्रिया को बिना किसी अड़चन के आगे बढ़ने दिया, उन्हें अब इस मामले की सुनवाई से चुपचाप अलग हो जाना चाहिए.
भले ही वे कुछ करने का फैसला करें, वे करते रह सकते हैं. किसी को परवाह नहीं. सुप्रीम कोर्ट जेन-जी के मतदान अधिकार और राज्य में हुए चुनावों को छीनने में शामिल रहा है.
सौरव दास ने बयान में कहा है कि महत्वपूर्ण याचिकाओं को समय पर न सुनकर और उन पर फैसला न देकर, जैसे महाराष्ट्र सरकार का गिरना, पार्टियों का टूटना, दिल्ली का संवैधानिक संकट मामला, इससे भाजपा को लाभ हुआ है. यह हमारी न्यायपालिका पर एक बड़ा दाग है.
इसलिए सुप्रीम कोर्ट की बेंच जो चाहे कर सकती है, लेकिन लोगों की नज़र में इसकी विश्वसनीयता बिल्कुल शून्य रहेगी. जवाबदेही भारत के लोगों, युवा पीढ़ी द्वारा तय की जाएगी. कोर्ट कल या जब चाहे, जो चाहे कर सकता है.

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस नरीमन की फाइल फोटो.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस नरीमन ने अपने एक वक्तव्य में कहा कि उनको इस बात का अफसोस है कि बंगाल में 90 लाख वोटरों के नाम हटाए जाने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रोसेस पर रोक नहीं लगाई.
जस्टिस नरीमन कहा- पश्चिम बंगाल चुनावों में 90 लाख वोटरों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया, यह एक चौंकाने वाला आंकड़ा है. 90 लाख वोटरों का अधिकार छिन जाने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. जिन लोगों का अधिकार छीना गया, उनमें से लगभग 22 लाख वोटरों ने अपील की. बाकी लोग शायद वे थे जिनके पास न्याय पाने के लिए जरूरी साधन नहीं थे.
और इन 22 लाख वोटरों में से, लगभग 1 लाख वोटरों की अपीलों में से 93% फ़ैसले वोटरों के पक्ष में आए. तो, आप सोच सकते हैं कि यह आम आदमी, यानी भारत के नागरिक को पूरी तरह से ग़ैर-कानूनी तरीके से बाहर करने जैसा था, ताकि सरकार अपनी मनचाही चीज हासिल कर सके. और पश्चिम बंगाल में हमने देखा कि इसने मौजूदा सरकार को हटा दिया और केंद्र की सरकार को सत्ता में ले आई. अब, ये बहुत ही चिंताजनक बातें हैं जो आज हमारे देश में हो रही हैं.