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मोदी सरकार ने शशि थरूर को संसदीय समिति के अध्यक्ष पद से हटाया, अधीर रंजन के साथ भाजपा सांसद ने कहा, बहाल करें…

NewDelhi : केंद्र की मोदी सरकार द्वारा कांग्रेस नेता शशि थरूर को संसदीय समिति के अध्यक्ष पद से हटा दिया जाना विपक्ष को नागवार गुजरा है. इसे लेकर लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी सहित संसद की स्थायी समिति के पांच सदस्यों ने स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा है. पक्ष में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के लिए सम्मानजनक व्यवहार की मांग की गयी है. सदस्यों द्वारा आग्रह किया गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी समिति के प्रमुख के रूप में शशि थरूर को फिर से बहाल किया जाये. इसे भी पढ़ें : बोले">https://lagatar.in/congress-leader-digvijay-singh-said-no-difference-between-rss-and-popular-front-of-india/">बोले

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 थरूर ने  कहा, मैं सरकार के असामान्य निर्णय से निराश हूं

लोकसभा अध्यक्ष को संयुक्त रूप से पत्र लिखने वाले पांच लोगों में सीपीएम के जॉन ब्रिटास, कांग्रेस के कार्ति चिदंबरम, टीएमसी की महुआ मोइत्रा और डीएमके की टी सुमति शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि इनमें भाजपा सासंद अनिल अग्रवाल भी शामिल हैं. शशि थरूर ने भी सरकार के फैसले पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि मैं सरकार के असामान्य निर्णय से निराश हूं. इस तरह की असहिष्णुता से संसदीय लोकतंत्र को नुकसान होता है. जान लें कि थरूर आईटी मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष थे. कांग्रेस ने मांग कि है कि अगर सरकार आईटी की समिति को अपने पास रखना चाहती तो उन्हें विदेश मामलों की समिति में बहला करे क्योंकि 2019 तक वह उनके पास ही थी. इसे भी पढ़ें : सुबह">https://lagatar.in/morning-news-diary-25-september-including-many-news-and-videos/">सुबह

की न्यूज डायरी।।25 सितंबर।।पंकज मिश्रा के घर में CM का पासबुक।।हेमंत सरकार में विकास ही विकास-JMM।।लक्ष्मीकांत प्रदेश BJP को दे गए अहम मंत्र।।यूनेस्को की सूची में दुर्गा पूजा।।झूलन को गार्ड ऑफ ऑनर।।समेत कई खबरें और वीडियो।।

  समिति की अध्यक्षता को बदल देना एक झटका है.

अधीर रंजन चौधरी ने ओम बिरला को लिखे में पता में ध्यान दिलाया है कि परंपरा के अनुसार प्रमुख विपक्षी दल के पास शीर्ष चार समितियों में से कम से कम एक होना चाहिए. पत्र के अनुसार समिति का आवंटन आम तौर पर नयी लोकसभा की शुरुआत में ही हो जाता है और यह तब तक बना रहता है जब तक कि कुछ असाधारण परिस्थितियों उसे भंग न कर दिया जाये. पत्र में लिखा गया है कि 17वीं लोकसभा के बीच में हमारी समिति की अध्यक्षता को बदल देना एक झटका है. कई संसदीय स्थायी समितियों में से, हमारी समिति लगातार बैठकें आयोजित करने में हमेशा सक्रिय रही है. [wpse_comments_template]

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