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मोहन भागवत 75 साल के हुए, पीएम मोदी ने संदेश लिखा, कांग्रेस ने कहा, God-se की तरह प्रवचन देते हैं

जयराम रमेश ने लिखा कि प्रधानमंत्री से सत्याग्रह की उत्पत्ति को याद रखने की उम्मीद करना बहुत ज्यादा हो जाता है, क्योंकि सत्य शब्द ही उनके लिए अपरिचित है. लिखा कि प्रधानमंत्री, जो स्वयं को नॉन-बायलॉजिकल बताते हैं, अपने प्रवचनों को ऐसे प्रस्तुत करते हैं मानो वे स्वयं God-se हों.
 

New Delhi : प्रधानमंत्री मोदी ने आज आरएसएस चीफ मोहन भागवत को इनके 75वें जन्मदिन पर बधाई दी और एक संदेश लिखा है. संदेश को लेकर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, प्रधानमंत्रा ने आरएसएस नेतृत्व को खुश करने की अपनी बेताब कोशिश में आज मोहन भागवत के 75वें जन्मदिन पर अतिशयोक्तिपूर्ण विशेष संदेश लिखा है.  

 

 

 

 

प्रधानमंत्री ने याद किया कि 11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में अपना अमर भाषण दिया था. जयराम रमेश ने लिखा कि प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में अल-कायदा के आतंकी हमले हुए थे.  लेकिन हैरानी की बात नहीं है कि प्रधानमंत्री ने यह ज़िक्र नहीं किया कि 11 सितंबर 1906 को महात्मा गांधी ने जोहान्सबर्ग में पहली बार सत्याग्रह का आह्वान किया था.

 

उसी समय दुनिया ने पहली बार इस क्रांतिकारी विचार को सुना था. श्री रमेश ने लिखा कि प्रधानमंत्री से सत्याग्रह की उत्पत्ति को याद रखने की उम्मीद करना बहुत ज्यादा हो जाता है, क्योंकि सत्य शब्द ही उनके लिए अपरिचित है. लिखा कि प्रधानमंत्री, जो स्वयं को नॉन-बायलॉजिकल बताते हैं, अपने प्रवचनों को ऐसे प्रस्तुत करते हैं मानो वे स्वयं God-se हों. 

 


 पीएम मोदी ने मोहन भागवत को जन्मदिवस की बधाई देते हुए लिखा कि उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम के मंत्र से प्रेरित होकर समता-समरसता और बंधुत्व की भावना को सशक्त करने में अपना पूरा जीवन समर्पित किया है. मां भारती की सेवा में सदैव तत्पर मोहन जी के 75वें जन्मदिन के विशेष अवसर पर मैंने उनके प्रेरक व्यक्तित्व को लेकर अपनी भावनाएं रखी हैं,  मैं उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं.

 


 पीएम ने लिखा कि स्वामी विवेकानंद द्वारा 1893 में आज ही के दिन शिकागो में दिया गया यह भाषण एक ऐतिहासिक क्षण माना जाता है. सद्भाव और विश्व बंधुत्व पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने विश्व मंच पर भारतीय संस्कृति के आदर्शों के बारे में भावपूर्ण ढंग से बात की.  यह सचमुच हमारे इतिहास के सबसे प्रसिद्ध और प्रेरक क्षणों में से एक है. 

 

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