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मोहन भागवत  ने भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की पूजा-अर्चना की, विज्ञान सम्मेलन में कहा, विज्ञान और धर्म के बीच टकराव नहीं

सम्मेलन में आरएसएस प्रमुख ने विज्ञान और धर्म के संबंधों पर अपने विचार व्यक्त किये. उन्होंने कहा कि विज्ञान और धर्म के बीच कोई टकराव नहीं है, दोनों अलग-अलग रास्ते अपनाते हुए सच्चाई की ही तलाश करते हैं. मोहन भागवत ने इस क्रम में कहा कि धर्म को अक्सर गलत समझा जाता है, जबकि धर्म असल में सृष्टि के कामकाज को नियंत्रित करने वाला विज्ञान  है. आरएसएस प्रमुख के अनुसार धर्म कोई संप्रदाय नहीं है.
 

Hyderabad : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आज शुक्रवार को तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की पूजा-अर्चना की. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अधिकारियों ने मंदिर में उनका स्वागत किया.  


मंदिर के पुजारियों ने रंगनायका मंडपम में मोहन भागवत को रेशमी वस्त्र भेंट किये और प्रसाद दिया. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू भी उनके साथ थे. 

 
इसके बाद चंद्रबाबू नायडू और मोहन भागवत तिरुपति में राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित चार दिवसीय भारतीय विज्ञान सम्मेलन में शामिल हुए. कार्यक्रम का समापन 29 दिसंबर को होगा. 

 
सम्मेलन में आरएसएस प्रमुख ने विज्ञान और धर्म के संबंधों पर अपने विचार व्यक्त किये. उन्होंने कहा कि विज्ञान और धर्म के बीच कोई टकराव नहीं है, दोनों अलग-अलग रास्ते अपनाते हुए सच्चाई की ही तलाश करते हैं.


मोहन भागवत ने इस क्रम में कहा कि धर्म को अक्सर गलत समझा जाता है, जबकि धर्म असल में सृष्टि के कामकाज को नियंत्रित करने वाला विज्ञान  है. आरएसएस प्रमुख के अनुसार धर्म कोई संप्रदाय नहीं है.


यह सृष्टि चलाने वाला कानून है. कोई इसे माने या न माने,  इसके दायरे से बाहर रहकर कार्य नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, धर्म में असंतुलन पैदा होना विनाश की ओर ले जायेगा.

 
मोहन भागवत के अनुसार विज्ञान ने ऐतिहासिक रूप से धर्म से दूरी बनाए रखी,  क्योंकि माना जाता था कि वैज्ञानिक अनुसंधान में इसका(धर्म) कोई स्थान नहीं है.  


आरएसएस प्रमुख ने इसे मौलिक रूप से गलत करार देते हुए कहा, विज्ञान और आध्यात्मिकता में एकमात्र अंतर उनकी कार्यप्रणाली में निहित है, क्योंकि दोनों का अंतिम लक्ष्य एक ही है.   


 संघ प्रमुख ने कहा कि आधुनिक विज्ञान अब सार्वभौमिक चेतना की बात कर रहा है. यह प्राचीन भारतीय दर्शन 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म के समान है.  


उन्होंने वैज्ञानिक और धार्मिक ज्ञान का प्रसार मातृभाषा में करने पर विशेष जोर दिया,  कहा कि भारतीय भाषाओं में धर्म और विज्ञान को व्यक्त करने के लिए ऐसे शब्द मौजूद हैं जो अन्य भाषाओं में नहीं पाये जाते.

 
जानकारी के अनुसार भारतीय विज्ञान सम्मेलन-2025 का आयोजन विज्ञान भारती के तत्वावधान में किया गया है. केंद्र सरकार के सहयोग से सम्मेलन का आयोजन किया गया है.


कार्यक्रम में कई विषयों पर पेपर प्रेजेंटेशन और चर्चाएं की जा रही है. सम्मेलन में देश भर के विश्वविद्यालयों के 1,200 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए हैं,  इससे पहले  मोहन भागवत ने गुरुवार को तिरुमाला में श्री भूवराह स्वामी में दर्शन पूजन किया.  

 


 
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