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22 जून को वक्फ एक्ट के विरोध में बरियातू में कार्यक्रम, सांसद इमरान प्रतापगढी होंगे शामिल

केंद्र सरकार की सोच यह है कि इन संपत्तियों को छीनकर उद्योगपतियों को सौंपा जाये. उन्होंने झारखंड के सभी अल्पसंख्यक समुदायों से इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके.
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  Ranchi :  इमरान प्रतापगाढी के झारखंड आगमन को लेकर सर्किट हाऊस रांची में अखिल भारतीय कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के कम्युनिकेशन इंचार्ज और झारखंड प्रभारी जीनल एन गाला व प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग अध्यक्ष मंजूर अंसारी ने प्रेस कान्फ्रेंन्स को संबोधित किया.

 

उन्होंने 22 जून को रांची के पहाड़ी मैदान, बरियातू में होने वाले विरोध कार्यक्रम की जानकारी दी. प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंजूर अंसारी ने कहा कि वक्फ संपत्तियां समाज की सेवा और धार्मिक उद्देश्यों के लिए होती हैं,  चाहे वह मस्जिद हो, मदरसा हो या सराय.

 

लेकिन केंद्र सरकार की सोच यह है कि इन संपत्तियों को छीनकर उद्योगपतियों को सौंपा जाये. उन्होंने झारखंड के सभी अल्पसंख्यक समुदायों से इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके.

 

इस अवसर पर जीनल एन गाला ने कहा, वक्फ बिल संसद से पारित हो चुका है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह स्थायी हो गया है. कृषि कानूनों की तरह इसे भी व्यापक जन विरोध से वापस कराया जा सकता है.

 

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी स्वयं उपस्थित रहेंगे और जनता को संबोधित करेंगे.

 

जीनल ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उजागर किया कि RSS की ऑनलाइन मैगजीन Organiser में प्रकाशित एक लेख में यहां तक कहा गया कि अब चर्च की संपत्तियों का भी सर्वेक्षण होना चाहिए. इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कानून सिर्फ मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी अल्पसंख्यकों की संपत्तियों को निशाना बनाने की मानसिकता का हिस्सा है.

 

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि  यह आंदोलन सिर्फ एक धार्मिक समुदाय की नहीं, बल्कि धर्मनिरपेक्षता और संविधान की रक्षा के लिए है. वक्ताओं ने कहा कि यह वक्त चुप रहने का नहीं, बल्कि सत्ता के अन्यायपूर्ण निर्णयों के खिलाफ आवाज़ उठाने का है.

 

 

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