Chatra: चतरा जिला में रेंजर सूर्यभूषण बिना एक्सटेंशन मिले सरकारी कार्यालय आ जा रहे हैं. सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. रेंजर सूर्यभूषण को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. सवालों में उनका शारीरिक फिटनेस से लेकर पत्नी के नाम दो एकड़ जमीन खरीदा जाना शामिल है.
जानकारी के मुताबिक रेंजर सूर्यभूषण पिछले आठ सालों से चतरा के हंटरगंज रेंज में ही हैं. पिछले दिनों उनका हर्ट सर्जरी हुआ था. इसके बाद भी उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने एक्सटेंशन के लिए जो अनुशंसा की उसमें रेंजर ने खुद को फिट बताया है. यह कैसे संभव है.
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दूसरी जानकारी जो सामने आ रही है कि वह यह कि रेंजर की पत्नी ने हंटरगंज के दाहा जंगल की जमीन अपनी पत्नी पार्वती कुमारी के नाम कर लिया है. यह जमीन पर्यटक स्थल कौलेश्वरी रोड पर है. रेंजर की पत्नी ने 30 दिसंबर 2018 को सरदार यशवंत सिंह व सरदार अजीत सिंह से दो एकड़ जमीन ली है. यशवंत सिंह व अजीत सिंह केदलीकला के रहने वाले हैं.
आरोप है कि जिस जमीन की खरीद रेंजर की पत्नी ने की है, वह जमीन खतियान में जंगल के रुप में दर्ज है. जमीन के बिक्रीनामा में बताया गया है कि जमींदार टेंगर सिंह से जमीन बंदोबस्त कराया है. विक्रेता यशवंत सिंह के पिता रामविलास सिंह व अजीत सिंह को उनके चाचा रामनारायण सिंह बंदोबस्ती में लेकर जमीन कब्जा लिया था.
जमीन को लेकर जब अंचलाधिकारी मिथलेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जमीन का म्यूटेशन किसी के नाम दर्ज नहीं है.
जैसा की रेंजर ने मीडिया में बयान दिया है कि जमीन खरीदते वक्त उन्हें यह पता नहीं था कि वह फॉरेस्ट लैंड है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सूर्यभूषण जिस रेंज के रेंजर पिछले आठ सालों से हैं, उसी रेंज की फॉरेस्ट लैंड को उनकी पत्नी कैसे खरीद ली? यह कैसे संभव है कि रेंजर को फॉरेस्ट लैंड के बारे में जानकारी नहीं होगी.
इस बीच चतरा जिला के कई लोगों ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को एक पत्र लिख करके दक्षिणी वन प्रमंडल चतरा के रेंजर सूर्यभूषण कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. लोगों का कहना है कि रेंजर सूर्यभूषण पिछले 8-10 वर्षों से एक ही क्षेत्र चतरा वन प्रमंडल अंतर्गत चतरा सदर, सिमरिया, पीरी, हंटरगंज और प्रतापपुर रेंज में पदस्थापित रहे हैं, जो सामान्य प्रशासनिक नियमों और सरकार की स्थानांतरण नीति के विपरीत है.
लोगों ने मांग की है कि रेंजर के सेवा विस्तार से जुड़े सभी पहलुओं, दस्तावेजों, मेडिकल फिटनेस, सेवा अभिलेख और विभागीय आवश्यकता की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए.

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