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रिटायरमेंट के बाद भी चतरा में जमे हैं रेंजर, सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर भी उठ रहे सवाल, विवादों में घिरा विभाग..!

  • सरकारी संसाधनों का कर रहे चोरी-छिपे इस्तेमाल!
  • बीते साल सेवानिवृत्ति के बाद मिला था एक साल का सेवा विस्तार, 28 फरवरी को हो चुकी है समाप्त..!
  • पुनः एक्सटेंशन के उम्मीद में चतरा में जमे हैं सूर्यभूषण, रांची का काट रहे चक्कर..?
  • 31 मार्च के अकाउंट क्लोजिंग में भी रेंजर पर कार्यालय में रह धांधली के लगे आरोप
  • किसके संरक्षण में रिटायरमेंट के बाद भी सरकारी संसाधनों का लाभ ले रहे सूर्यभूषण..?

Chatra :  दक्षिणी वन प्रमंडल एक बार फिर विवादों के घेरे में है. इस बार मामला रिटायर हो चुके रेंजर सूर्यभूषण कुमार के नियमविरुद्ध कार्यालय में बने रहने और सरकारी संसाधनों के कथित उपयोग से जुड़ा है.

 

जानकारी के अनुसार, सूर्यभूषण कुमार 28 फरवरी 2025 को सेवानिवृत्त हो गए थे, जिसके बाद सरकार ने उन्हें एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया था. यह विस्तार भी 28 फरवरी 2026 को समाप्त हो चुका है. बावजूद इसके वे अब भी कार्यालय और क्षेत्र में सक्रिय बताए जा रहे हैं.

 

सूत्रों के मुताबिक, विभागीय कागजों में चतरा वन क्षेत्र का प्रभार प्रतापपुर रेंजर को सौंप दिया गया है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. अधीनस्थ कर्मियों के बीच अब भी सूर्यभूषण कुमार का प्रभाव कायम है और वे कथित रूप से सरकारी वाहन समेत अन्य संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं.

 

इस स्थिति ने विभागीय व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विभाग से जुड़े संवेदकों की मानें तो रिटायरमेंट के बाद भी अभी तक विभागीय अधिकारियों द्वारा किसी कार्य के निष्पादन और बिल भुगतान के लिए रेंजर सूर्यभूषण कुमार से ही मिलने की बात कही जा रही है.

 

मार्च क्लोजिंग के दौरान भी सूर्यभूषण कुमार के दरबार में भीड़ थी. जानकारी के अनुसार, रिटायर हो चुके रेंजर सूर्यभूषण कुमार को एक बार फिर सेवा विस्तार की उम्मीद है. इसी उम्मीद पर वह अभी तक चतरा में जमे हुए हैं और सेवा विस्तार के लिए लगातार रांची के चक्कर काट रहे हैं.

 

 

सरकारी संसाधनों का उपयोग करना गलत, जांच के बाद होगी कार्रवाई : डीएफओ

मामले को लेकर जब वन प्रमंडल पदाधिकारी मुकेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि रिटायरमेंट के बाद किसी भी कर्मी द्वारा सरकारी संसाधनों का उपयोग नियमों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि अगर शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह पूरी तरह नियम विरुद्ध है.

 

रिटायरमेंट के बाद न तो कार्यालय में नियमित उपस्थिति की अनुमति है और न ही सरकारी वाहन या अन्य संसाधनों के उपयोग की. यहां तक कि क्षेत्र भ्रमण भी सरकारी कर्मियों के साथ नहीं किया जा सकता.

 

उन्होंने आगे कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. इस घटनाक्रम से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और यह देखना अहम होगा कि जांच के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं. 

 

 

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