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झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में खूंटी में मुंडारी भाषा की उपेक्षा, नहीं मिला स्थान

Khunti: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से मुंडारी भाषा  को खूंटी जैसे प्रमुख मुंडा बहुल जिले में शामिल न किया जाना अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है.


मुंडारी साहित्य परिषद के सचिव डॉ. अजीत मुंडा ने इस फैसले पर गहरा आक्रोश और आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यह न केवल धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की मातृभाषा का अपमान है, बल्कि मुंडा समुदाय के बच्चों के भाषा अधिकारों का भी सीधा उल्लंघन है. उन्होंने कहा, “खूंटी जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से मुंडा बहुल क्षेत्र में मुंडारी भाषा को नजरअंदाज करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. शिक्षक पात्रता परीक्षा में मातृभाषा में पढ़ने के अधिकार को दरकिनार नहीं किया जा सकता.”


उन्होंने यह भी मांग की कि न सिर्फ खूंटी, बल्कि रामगढ़, गिरिडीह, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग, लातेहार, गुमला और लोहरदगा जैसे जिलों में भी मुंडारी भाषा को JTET में समुचित स्थान दिया जाए, ताकि मुंडारी में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को उनका संवैधानिक अधिकार मिल सके.

 

तमाड़ विधायक सुदीप गुड़िया ने सौंपा ज्ञापन


मुंडारी भाषा को झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) नियमावली 2025 के ड्राफ्ट में शामिल न किए जाने को लेकर खूंटी जिले सहित तमाम मुंडा बहुल क्षेत्रों में भारी आक्रोश फैल गया है.


तमाड़ विधायक सुदीप गुड़िया शुक्रवार को रांची स्थित शिक्षा विभाग मुख्यालय पहुंचे और विभागीय सचिव से मुलाक़ात कर एक ज्ञापन सौंपा. उन्होंने स्पष्ट कहा कि, मुंडारी भाषा को JTET के नियमावली में शामिल न करना एक ऐतिहासिक भूल है. खूंटी को केवल खड़िया और कुड़ुख भाषा का विकल्प देना, मुंडा समाज के साथ अन्याय है.


विधायक ने मांग की कि मुंडारी भाषा को तत्काल JTET नियमावली में शामिल किया जाए. उन्होंने कहा कि मुंडारी को हटाना न केवल भगवान बिरसा मुंडा, बल्कि मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और अन्य जनजातीय आंदोलनकारियों का भी अपमान है.

 

खूंटी विधायक राम सूर्या मुंडा का भी विरोध 


खूंटी विधायक राम सूर्या मुंडा ने भी इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि, मुंडारी भाषा को हटाना मुंडा समाज के छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है. खूंटी जैसे क्षेत्र, जहां जयपाल सिंह मुंडा, एन.ई. होरो और डॉ. रामदयाल मुंडा जैसे विद्वान और जननायक जन्मे हैं, वहां से मुंडारी भाषा को हटाना कतई उचित नहीं है.
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस निर्णय को तत्काल वापस ले और मुंडारी भाषा को JTET की सूची में सम्मानजनक स्थान दे.

 

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