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नगर निकाय चुनाव : ट्रिपल टेस्ट के लिए जल्द होगा आयोग का गठन, कैबिनेट में आ सकता है प्रस्ताव

  • अक्टूबर-नवंबर तक हो सकता है निकाय चुनाव
Ranchi : झारखंड में नगर निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण की सीमा तय करने के लिए जल्द आयोग का गठन होगा. विभागीय सूत्रों ने उम्मीद जतायी है कि कैबिनेट की अगली बैठक में आयोग गठन करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है. कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद डेढ़ से दो महीने में कमीशन अपनी सिफारिश सरकार को सौंपेगी. इसके बाद राज्य सरकार चुनाव कराने का फैसला लेगी. अगर सबकुछ ठीक रहा तो इसी साल अक्टूबर-नवंबर तक राज्य में नगर निकाय चुनाव हो जायेंगे. हाईकोर्ट के किसी सीटिंग या रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमीशन बनायी जा सकती है. (पढ़ें, जमीन">https://lagatar.in/some-policemen-are-also-partners-in-land-scam-ed-should-investigate-complaints-babulal/">जमीन

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यूपी -बिहार में 2 से 3 महीने में आयोग ने दी थी रिपोर्ट

राज्य सरकार ओबीसी आरक्षण और कमीशन गठन उत्तर प्रदेश और बिहार की तर्ज पर कर सकती है. यूपी ने जनवरी 2023 में ट्रिपल टेस्ट के लिए कमीशन बनाया था, जिसने 75 जिलों का सर्वे कर 2 महीने 10 दिन में रिपोर्ट सौंप दी थी. कमेटी गठित होने के बाद चुनाव होने और नतीजे आने में सिर्फ 5 महीने लगे. वहीं बिहार में भी गठित कमेटी ने 2 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी. इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि झारखंड को भी 24 जिलों का सर्वे करने में डेढ़ से 2 महीने से ज्यादा समय नहीं लगेगा. इसे भी पढ़ें : इलियाना">https://lagatar.in/ileana-dcruz-shared-a-picture-flaunting-her-baby-bump-pregnancy-glow-on-her-face/">इलियाना

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राज्य के 48 निकायों में कराया जाना है चुनाव

हेमंत सरकार राज्य में जल्द निकाय चुनाव कराना चाहती है. अगर निकाय चुनाव जल्द नहीं हुए तो राज्य को 15वें वित्त आयोग की मदद से वंचित होना पड़ सकता है. शहरी निकायों के विकास के लिए झारखंड ने करीब 1600 करोड़ रुपये का दावा वित्त आयोग से किया है. झारखंड में 48 नगर निकायों में चुनाव कराया जाना है. 34 निकायों का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो चुका है, जबकि 13 निकायों में पिछले 3 साल से चुनाव लंबित है. इसे भी पढ़ें : जमीन">https://lagatar.in/some-policemen-are-also-partners-in-land-scam-ed-should-investigate-complaints-babulal/">जमीन

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जानें क्या है ट्रिपल टेस्ट

  1.  स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति, प्रभावों की जांच के लिए एक समर्पित आयोग की स्थापना.
  2. आयोग की सिफारिशों के आधार पर निकायवार आरक्षण का निर्धारण करना.
  3. किसी भी मामले में एसटी/एससी/ओबीसी के लिए रिजर्व कुल सीटों के 50% से अधिक आरक्षण न हो.
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