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मुसाबनी : बागजांता माइंस सड़क विस्थापित कमिटी ने नौ मई से आंदोलन करने का लिया निर्णय

Musabani (Sanat Kumar Pani) : मुसाबनी प्रखंड के लाटिया चौक पर रविवार को बागजांता माइंस सड़क विस्थापित कमेटी की बैठक सूरज प्रसाद साहू के अध्यक्षता में आयोजित हुई. बैठक में सड़क विस्थापितों के सभी रैयतदार उपस्थित थे. बैठक में अपने तीन सूत्री मांगों को लेकर विगत दिनों यूसिल को एक मांग पत्र सौंपने एवं इन मांगों पर विचार करने के लिए समय दिया गया था. इस पर चर्चा की गयी. बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित सड़क विस्थापित कमिटी के संरक्षक व पूर्व जिला पार्षद बुद्धेश्वर मुर्मू ने सभी रैयतदरों को जानकारी देते हुए बताया कि सड़क विस्थापितों द्वारा विगत दिनों यूसिल प्रबंधक के समक्ष तीन सूत्री मांगों को लेकर एक आवेदन दिया गया था. तीन मांगों के आवेदन पर यूसिल प्रबंधक ने विगत चार मई को एक जवाबी पत्र सड़क विस्थापित कमेटी को प्रेषित किया. इस पत्र में तीनों मागों के जवाब यूसिल द्वारा दिग्भ्रमित करते हुए प्रेषित किया गया है. इसे भी पढ़ें :बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragora-high-mast-light-is-bad-in-salbani-for-several-months/">बहरागोड़ा

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यूसिल को जमीन परिवहन उपयोग के लिए नहीं दिया जाएगा - बुद्धेश्वर

विस्थापित कमेटी ने इस पर असंतुष्ट जाहिर करते हुए सक्षम पदाधिकारी एवं वरीय प्रबंधकों के उपस्थिति में ही सड़क विस्थापितों की मांगों पर सार्थक पहल कर विचार करने पर ही अपने पूर्व निर्धारित आंदोलन का कार्यक्रम पर विचार किया जा सकता है. बुद्धेश्वर मुर्मू ने कहा कि अपने रैयती जगह को यूसिल के बागजाता माइंस जाने के लिए विगत 15-16 वर्षो से उपयोग के लिए छोड़ कर सहयोग करते आ रहे हैं. इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी कंपनी प्रबंधक ने हमें सिर्फ आश्वासन पर ही अपना व्यवसाय कर आर्थिक और मानसिक रूप से शोषण किया. जिसके कारण सभी रैयती को काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि सभी रैयतदारों ने निर्णय लिया कि अब अपने जमीन को यूसिल को परिवहन उपयोग के लिए नहीं दिया जाएगा. यूसिल अपना रास्ता दूसरे तरफ से ढूंढ ले. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-dozen-pds-shops-found-closed-in-sor-inspection-clarification-sought-from-licensees/">जमशेदपुर

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रैयती जमीन पर अनुमति के बिना चलने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा

उन्होंने कहा कि जमीन हमारी, अधिकार तुम्हारा अब ये यूसिल की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी. रैयती जमीन पर नौ मई से रोकने के बावजूद कोई भी व्यक्ति हमारे जमीन पर हमारे अनुमति के बिना जबरन चलने की कोशिश की तो उस पर आदिवासी की जमीन पर जबरन चलने एवं हमें प्रताड़ना के मामले में संबंधित व्यक्ति पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत नामजद मुकदमा दर्ज किया जाएगा. इसमें चाहे प्रशासन हो या प्रबंधक. बंदी में रैयती जमीन पर आम आदमी और साइकिल या मोटर साइकिल से जानेवाले कर्मचारियों को नियमित दिनों की तरह आवागमन में किसी प्रकार का रोका नहीं जाएगा. बैठक में अपने अपनी रैयती जमीन पर अपने परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा संख्या में रहने का निर्णय लिया गया. बैठक में मुख्य रूप से बुद्धेश्वर मुर्मू, सूरज प्रसाद साहू, सुनील कुमार महाली, बरियाड टुडू, मदन टुडू, कुना राम टुडू, राकेश मुर्मू, रमेश महाली आदि रैयतदार उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें :चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-cadets-of-scout-and-guide-quenched-the-thirst-of-passengers-at-the-railway-station/">चक्रधरपुर

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