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CUJ में GST 2.0 पर राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, ‘विकसित भारत’ के लिए कर सुधारों पर गहन मंथन

केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आज समापन हुआ. इसका विषय “GST 2.0: Sectoral Analysis, Digital Compliance and Consumption Shifts – Implications for a Viksit Bharat” था.
 

Ranchi : केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आज समापन हुआ. इसका विषय “GST 2.0: Sectoral Analysis, Digital Compliance and Consumption Shifts – Implications for a Viksit Bharat” था. 

 

व्यवसाय प्रशासन विभाग एवं वाणिज्य एवं वित्तीय अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन ने कर सुधारों और आर्थिक विकास के मुद्दों पर गंभीर राष्ट्रीय विमर्श को नई दिशा दी.

 

सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने जीएसटी 2.0 के विभिन्न पहलुओं पर अपने शोध प्रस्तुत किए. डिजिटल अनुपालन, डेटा-आधारित कर प्रणाली, MSMEs पर प्रभाव, उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव तथा “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में जीएसटी की भूमिका जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई. वक्ताओं ने जोर दिया कि सरल, पारदर्शी और तकनीक-आधारित कर प्रणाली ही भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ा सकती है.

 

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “GST 2.0 & Its Overall Impact Towards Viksit Bharat” विषय पर पैनल चर्चा रही, जिसका संचालन प्रो. के.बी. सिंह ने किया. पैनल में अजय दीप वाधवा, आदित्य शाह, डॉ. संजय सिंह एवं प्रो. बटेश्वर सिंह शामिल रहे. पैनलिस्टों ने कर ढांचे के सरलीकरण, दरों के तर्कसंगत निर्धारण, उपभोग को बढ़ावा और आर्थिक दक्षता जैसे मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार रखे.

 

वैलिडिक्टरी सत्र में मुख्य अतिथि रवि चंद्र गोयल, मुख्य वक्ता डॉ. संजय सिंह और विशिष्ट अतिथि अभिनव शाह उपस्थित रहे. इस अवसर पर डॉ. नितेश भाटिया द्वारा मुख्य अतिथि को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संयोजन डॉ. प्रणय पराशर एवं डॉ. नितेश भाटिया ने किया.

 

वक्ताओं ने अपने संबोधन में जीएसटी 2.0 के प्रभाव, उद्यमिता के विस्तार, डिजिटलाइजेशन की भूमिका और बैंकिंग क्षेत्र के योगदान पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम के अंत में डॉ. नितेश भाटिया ने सम्मेलन का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. प्रणय पराशर ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया.

 

यह सम्मेलन न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने जीएसटी 2.0 के माध्यम से भारत को एक मजबूत, पारदर्शी और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए ठोस सुझाव भी प्रस्तुत किए.

 

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