New Delhi: नदियों से निकलने वाली गाद का इस्तेमाल अब राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में किया जाएगा. नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच ‘बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति 2026’ के तहत एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और बिहार के सीएम सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुए इस समझौते के तहत नदियों और जलाशयों से वैज्ञानिक तरीके से निकाली गई गाद का इस्तेमाल हाइवे के निर्माण और भराई में किया जाएगा. गाद प्रबंधन नीति लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन गया है.
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नदियों में गाद का जमाव बिहार में जलप्रवाह की सबसे बड़ी रुकावटों में से एक रहा है. इसी संकट को संसाधन में बदलने के लिए बिहार सरकार और केंद्र के बीच एक साझा सहमति बनी है. 17 सितंबर 2026 को अधिसूचित राज्य की नई सिल्ट प्रबंधन नीति के तहत अब एनएचआई की सड़क परियोजनाओं में खेतों की उपजाऊ मिट्टी की जगह नदियों से निकाली गई तलछट का इस्तेमाल किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे देश भर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल करार दिया है.
इस समझौते के तहत बिहार की 27 सड़क परियोजनाओं में करीब 835 लाख घन मीटर गाद के इस्तेमाल का प्रस्ताव है. वहीं फिलहाल निर्माणाधीन 16 परियोजनाओं में नदियों से निकाली गई 243 लाख घन मीटर गाद मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी.
सीएम सम्राट चौधऱी ने कहा कि बिहार की कई नदियों में एक-दो नहीं, बल्कि 10-10 मीटर तक गाद जमा है. इतनी गाद होने से नदियों में पानी के बहाव पर असर पड़ता है.
उन्होंने कहा कि अब नदियों से निकाली गई गाद का इस्तेमाल बिहार में होने वाले निर्माण कार्यों में किया जाएगा. इससे राज्य में कई आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगा.
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