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नेशनल शूटर शिखा राणा की व्यथा : निशाने के लिए अपना पिस्टल भी नहीं

सलेक्शन हुआ, तो कैसे करेंगी देश का प्रतिनिधित्व, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सहयोग की गुहार डिस्ट्रिक्ट में तीन गोल्ड, राज्य में एक कांस्य पदक, राज्य भर में पांचवां रैंक और दो बार नेशनल सलेक्शन में ले चुकी हैं भाग जब खेलेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया का संदेश कैसे होगा सार्थक Gaurav Prakash Hazaribagh : जब खेलेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया श्लोगन हजारीबाग में चरितार्थ होता नहीं दिख रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर दो बार ट्रायल में हिस्सा लेने वाली शूटर शिखा राणा के पास अपना पिस्टल भी नहीं है. लेकिन मेहनत और जज्बा में कोई कमी नहीं है. तभी तो डिस्ट्रिक्ट में तीन गोल्ड, राज्य में एक कांस्य पदक, राज्य भर में पांचवां रैंक और दो बार नेशनल सलेक्शन में हिस्सा ले चुकी हैं. सरकार गांव की खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित करने के लिए न जाने कितना योजनाएं चला रही हैं. लेकिन धरातल पर उतरती नहीं दिख रही है, जिसका जीता जागता उदाहरण शिखा राणा है . शिखा राणा की इच्छा है कि वह ओलंपिक में भारत को रिप्रेजेंट करें. लेकिन उसके पास अपना पिस्टल भी नहीं है. ऐसे में वह जनप्रतिनिधि और सरकार से यह उम्मीद लगाई है कि उसे मदद मिले ताकि वह अच्छा प्रदर्शन कर सके. इसे भी पढ़ें :हजारीबाग">https://lagatar.in/hazaribagh-awareness-camp-on-climate-change-and-smart-agriculture-tips-given-to-increase-agricultural-production/">हजारीबाग

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पिस्टल नहीं होने से प्रैक्टिस प्रभावित

बिना पिस्टल के ही उसने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर में अपनी पहचान बना चुकी है. शिखा बताती है कि कुमार सुरेंद्र सुरभि शूटिंग प्रतियोगिता भोपाल में होने जा रही है. इसमें पूरे देश भर से शूटर पहुंचेंगे. उसमें उसका भी सलेक्शन हुआ है. लेकिन पिस्टल नहीं होने के कारण प्रैक्टिस नहीं कर पा रही है. वह बताती है कि हजारीबाग शूटिंग क्लब की मेंबर हैं और क्लब के ही पिस्टल से प्रैक्टिस करती हैं. इसकी बदौलत आज अपनी पहचान वह बना रही है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/ssss-2-8.jpg"

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सरकार और जिला प्रशासन से सहयोग की उम्मीद

12वीं कक्षा की छात्रा ने अपनी मेहनत के बदौलत यह मुकाम हासिल किया है. शिखा बताती है कि दो बार नेशनल के सलेक्शन के लिए ट्रायल में हिस्सा ले चुकी हैं. दो माह पूर्व ट्रायल भी पूरा हो चुका है. अब उम्मीद है कि इंडियन टीम में सलेक्शन हो जाए. लेकिन आर्थिक अभाव के कारण समस्या आ रही है. यही नहीं उसका कहना यह भी है कि पैसे की कमी के कारण कई बार कंपटीशन में हिस्सा भी नहीं ले पाई. अब सरकार और जिला प्रशासन से सहयोग की उम्मीद है कि उसे मदद मिले ताकि ऊंची उड़ान वह ले सके. इसे भी पढ़ें :बेरमो:">https://lagatar.in/bermo-kisan-sabha-protest-against-conspiracy-to-stop-mnrega/">बेरमो:

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शिखा राणा ओलंपिक में जाकर देश का नाम रोशन करना चाहती है

शिखा राणा हजारीबाग के लुपुंग की रहने वाली है. पढ़ाई और प्रैक्टिस करने के लिए वह किराए के मकान में अटल चौक के पास रह रही हैं. एक भाई और एक बहन है. दोनों अपना करियर शूटिंग के क्षेत्र में बनाना चाहते हैं. शिखा कहती है कि अगर उसे मदद मिले, तो वह दिन-रात मेहनत कर ओलंपिक में जाकर देश का नाम रोशन करेंगी. शिखा राणा के पिता रामकुमार राणा कारपेंटर मिस्त्री तथा माता संगीता देवी घर पर सिलाई का काम करती हैं. मुश्किल से परिवार का भरण-पोषण होता है. बच्चों की इच्छा पूरी करने के लिए प्रयासरत भी हैं. शिखा राणा के माता पिता बेटी की सपना पूरा करने के लिए जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील की है. [wpse_comments_template]

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