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उपग्रह आंकड़ों से वन फीनोलॉजी की निगरानी पर BIT मेसरा रांची में राष्ट्रीय कार्यशाला

Ranchi : “उपग्रह आंकड़ों का उपयोग करते हुए फीनो-कैम आधारित वन फीनोलॉजी निगरानी कार्यक्रम” विषय पर एक-दिवसीय विचार-मंथन कार्यशाला का सफल आयोजन आज हुआ. 

 

यह आयोजन रिमोट सेंसिंग एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (B.I.T.) मेसरा, रांची में किया गया. इस कार्यशाला का संयुक्त आयोजन रीजनल रिमोट सेंसिंग सेंटर–ईस्ट (RRSC-East), नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC), इसरो तथा B.I.T. मेसरा द्वारा किया गया.

 

कार्यशाला में झारखंड वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ देश के विभिन्न संस्थानों से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की.

 

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वन विभाग के अधिकारियों एवं संबंधित कार्मिकों को वन फीनोलॉजी की अवधारणा से परिचित कराना तथा उपग्रह आंकड़ों, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी और भू-आधारित फीनो-कैम (PhenoCAM) प्रणाली की भूमिका को समझाना था, जिससे जलवायु परिवर्तन के कारण वनों में होने वाले बदलावों—जैसे पत्तियों का गिरना, हरियाली की शुरुआत, हरियाली का चरम, पुष्पन एवं फलन—का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सके.

 

कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन सत्र एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि रवि रंजन, आईएफएस, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF), झारखंड सरकार ने जलवायु-अनुकूल वन प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भू-स्थानिक तकनीकें वन प्रशासन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं. B.I.T. मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने झारखंड के वनों में फीनो-कैम टॉवर स्थापना की इसरो की पहल का स्वागत करते हुए इसे जलवायु प्रभावों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.

 

इस अवसर पर डॉ. के. चंद्रशेखर, ग्रुप डायरेक्टर, एनआरएससी, इसरो, हैदराबाद ने पृथ्वी अवलोकन एवं जलवायु अनुप्रयोगों के क्षेत्र में इसरो की विभिन्न पहलों की जानकारी दी.

 

वहीं, डॉ. वर्गीस ए. ओ., उप महाप्रबंधक, आरआरएससी-ईस्ट, एनआरएससी, इसरो ने स्वागत भाषण में दीर्घकालिक वन निगरानी के लिए उपग्रह आंकड़ों और भू-आधारित अवलोकनों के एकीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला.

 

प्रो. ए. पी. कृष्णा, विभागाध्यक्ष, रिमोट सेंसिंग एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग, B.I.T. मेसरा ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में फीनोलॉजी अध्ययनों की शोध एवं सामाजिक प्रासंगिकता को रेखांकित किया.

 

उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. नीरज प्रियदर्शी, वैज्ञानिक–एसएफ, एनआरएससी, इसरो एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.

 

तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने वन फीनोलॉजी, फीनोफेज एवं जलवायु परिवर्तनशीलता से उनके संबंधों पर विस्तार से चर्चा की. डॉ. वर्गीस ए. ओ. ने वन फीनोलॉजी के मूल सिद्धांतों की व्याख्या की, जबकि एस. आर. नटेश, आईएफएस ने प्रशासनिक एवं क्षेत्रीय दृष्टिकोण से जलवायु-अनुकूल वन प्रबंधन रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए.

 

डॉ. सी. पी. सिंह, उप निदेशक, इन-स्पेस (IN-SPACe) ने भारत में राष्ट्रीय फीनो-कैम नेटवर्क विकसित करने से जुड़ी चुनौतियों एवं अवसरों पर प्रकाश डाला. डॉ. जी. एस. पुजार, इसरो मुख्यालय ने रिमोट सेंसिंग उपग्रहों में हालिया प्रगति और उनके फीनोलॉजी निगरानी में उपयोग पर प्रस्तुति दी.

 

परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. नीरज प्रियदर्शी ने परियोजना की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी. कार्यशाला संयोजक प्रो. वी. एस. राठौर ने मौसमीय मानकों का वन फीनोलॉजी एवं पौधों की वृद्धि पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा करते हुए झारखंड के संदर्भ में दीर्घकालिक जलवायु प्रवृत्तियों को रेखांकित किया. इसके अतिरिक्त, प्रो. ए. पी. कृष्णा ने फीनो-कैम प्रणाली की संरचना, आंकड़ा प्रसंस्करण एवं सूचना निष्कर्षण तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी.

 

कार्यशाला का समापन संवादात्मक समूह चर्चा एवं समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने संचालन संबंधी चुनौतियों, आंकड़ा एकीकरण तथा शैक्षणिक संस्थानों, इसरो केंद्रों और वन विभागों के बीच भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया.

 

कार्यशाला ने B.I.T. मेसरा, एनआरएससी/इसरो तथा झारखंड वन विभाग के बीच संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया, जो जलवायु-संवेदी वन निगरानी एवं साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण को सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगा.

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