Ranchi News : कभी नक्सली गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहे और पुलिस के लिए चुनौती बने नक्सली कमांडर कुंदन पाहन समेत कई आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली अब अपने जीवन को नई दिशा देने में जुटे हैं. हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले इन लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया.
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60 बंदियों को 45 दिनों का दिया गया प्रशिक्षण
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत भारत सरकार के अधीन कार्यरत जन शिक्षण संस्थान की ओर से हजारीबाग स्थित ओपन जेल में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम के तहत जेल में बंद 60 महिला और पुरुष बंदियों को कढ़ाई, सिलाई, मुर्गी पालन और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया.
कुंदन पाहन समेत कई लोगों को मिला प्रमाण पत्र
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने बंदियों को प्रमाण पत्र दिया. प्रमाण पत्र प्राप्त करने वालों में नक्सली कमांडर कुंदन पाहन के अलावा मुकेश गांझू, महाराज प्रमाणिक, प्रिशिला देवी, प्रेमशीला हेंब्रम और किरण टुडू समेत अन्य बंदी शामिल रहे.
महिला बंदियों को कराया जाएगा ब्यूटीशियन कोर्स
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बंदियों को रोजगारपरक हुनर सिखाकर आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि जेल से बाहर आने के बाद सम्मानजनक जीवन जी सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर अपनी नई शुरुआत कर सकें. कार्यक्रम के दौरान आगे के कौशल विकास कार्यक्रमों की भी शुरुआत की गई.
इसके तहत आत्मसमर्पण कर चुकी 22 महिला बंदियों को 80 दिनों का ब्यूटीशियन कोर्स सिखाया जाएगा. साथ ही 30 बंदियों के लिए वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण सत्र भी शुरू किया गया. इस दौरान रुद्राक्ष और आंवला के पौधों का रोपण किया गया. कार्यक्रम के दौरान जेल प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद थे.

