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स्याहीकांड के बाद नेहा बोरा का प्रेस कॉन्फ्रेंस, छात्र आंदोलन के समर्थन में सरकार पर साधा निशाना

AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने रांची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड के छात्र आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और AISA उनके साथ खड़ी है.
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Ranchi: AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने रांची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड के छात्र आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और AISA उनके साथ खड़ी है.

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा ने छात्रों की तीन प्रमुख मांगों को दोहराया. उन्होंने कहा कि कथित धांधली के आरोपों के चलते 14वीं JPSC परीक्षा रद्द कर री-एग्जाम कराया जाए, JSSC CGL परीक्षा भी रद्द कर दोबारा आयोजित की जाए, TDPL और NTA जैसी निजी एजेंसियों से परीक्षाएं कराने की व्यवस्था समाप्त कर सरकारी संस्थानों को इसकी जिम्मेदारी दी जाए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके.

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बिरसा मुंडा चौक से छात्र आंदोलन के समर्थन में विधानसभा की ओर मार्च निकाला गया. इसी दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर एक युवक ने स्याही फेंक दी. प्रदर्शनकारियों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया. नेहा ने बताया आरोपी की पहचान अमरनाथ पांडे (26) के रूप में हुई है, जो हजारीबाग का रहने वाला और विनोबा भावे विश्वविद्यालय का छात्र है. मामले की जांच जारी है.

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने सत्ता पक्ष और INDIA गठबंधन से आंदोलनरत छात्रों की मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील की. साथ ही उन्होंने घोषणा की कि 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च में AISA पूरी ताकत के साथ शामिल होगा.

 

जंतर-मंतर आंदोलन में कथित "देश विरोधी" नारों के सवाल पर नेहा बोरा ने कहा कि ऐसे आरोप पूरी तरह भ्रामक हैं. उनके अनुसार आंदोलन के दौरान सरकार और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ नारे लगाए गए थे, न कि देश के खिलाफ. उन्होंने कहा कि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है.

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